Thursday, 26 February 2015

Avoid some herbal during pregnancy

भ्रूण का विकास
भ्रूण का विकास
गर्भावस्था के दौरान लौंग, दारुहल्दी, जैस्मीन हो सकता है हानिकारक

गर्भावस्था के दौरान किसी बीमारी का उपचार करवाके समय जरा ध्यान रखें, क्योंकि कई बार कुछ दवाएं या जड़ी-बूटियां फायदे के बजाए नुकसान पहुंचा सकती हैं। जब आप गर्भवती हैं तो दवाओं का उपयोग करते समय आपको जरा अतिरिक्त सावधानी बरतें एवं साथ ही आप गर्भावस्था को सुरक्षित और स्वस्थ बनाये रखने के लिए अन्य  तरीकों को अपनाएं। गर्भावस्था के दौरान कई जड़ी-बूटियां गर्भपात, अपरिपक्व जन्म या भ्रूण के चोट लगने, अग्रणी संकुचन आदि का कारण हो सकती हैं। इसके साथ ही उच्च रक्तचाप और जन्म दोष भी पैदा हो सकता है।
गर्भावस्थाफ के दौरान हर्ब के नुकसान
गर्भावस्था के दौरान कई हर्बल उपचार, हर्बल सप्लीमेंट, हर्बल दवाओं या औषधीय जड़ी-बूटियों आदि का सेवन गर्भवती महिला और गर्भस्थ् शिशु दोनों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ये दवाइयां फार्मेसियों में पाउडर, हर्बल सुई, कैप्सूल या गोलियों के रूप में उपलब्ध होती हैं। गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान खासतौर पर इनसे दूर रहना चाहिए।  सबसे जरूरी बात है कि गर्भावस्था या प्रसव के दौरान किसी भी प्रकार के हर्बल उपचार को करवाने से पहले अपने डॉक्टकर से सलाह जरूर लें।
गर्भावस्था के दौरान इन हर्बल को लेने से बचें
  गर्भावस्था में संतुलित भोजन
गर्भावस्था में संतुलित भोजन
  • मुसब्बर वेरा : ये गर्भपात और जन्म दोष का कारण बन सकता है। दीर्घकालिक जटिलताओं के अलावा पोटेशियम की कमी, हृदय की समस्याओं और मांसपेशियों में कमजोरी को भी बढ़ाता हैं।
  • लौंग : दिल की बीमारियों की जटिलताओं और रक्त के थक्के जमने का कारण हो सकता है।
  • जैस्मीन : गर्भपात या समय से पहले प्रसव का कारण हो सकता है।
  • दाल चीनी : दिल की बीमारियों को जन्म दे सकती है।
  • सौंफ : त्वचा में जलन पैदा कर सकता है।
  • लहसुन : गर्भाशय संकुचन और गर्भपात की जटिलताओं को जन्म दे सकती है।
  • लेडी मेंटल : इसकी ज्यानदा खुराक लेने से दिल की बीमारियां के होने का खतरा बढ़ सकता है।
  • हिरन का सींग : ये ऐंठन और मतली जैसी का कारण हो सकती है।
  • दारुहल्दी : निम्न रक्त चाप और भ्रूण संकट का कारण बन सकता है।
  • आर्बर : उल्टी, दौरे, दस्त, अस्थमा और गर्भपात जैसे जटिलताओं के कारण हो सकता है।
  • कड़वे ऑरेंज : स्ट्रोक का कारण बन सकता है।
  • बेथ जड़ : इससे पेट की समस्यान हो सकती है, और यह गर्भपात या समय से पहले प्रसव का कारण हो सकता है।
  • एक प्रकार का पुदीना या मेंथा : जड़ी-बूटी दिल और गुर्दे को प्रभावित हो सकती है। यह खून की उल्टी, रक्तचाप और रक्त के थक्के जैसे विकारों को जन्म दे सकता है।
  • अजवायन की पत्ती : गर्भाशय उत्तेजना पैदा करने के लिए, गर्भपात के लिए अग्रणी हो सकता है। 
गर्भावस्था की योजना }o{ मनचाही संतान }o{ भ्रूण का विकास }o{ गर्भावस्था के लक्षण }o{ गर्भधारण के बाद सावधानियां }o{ गर्भावस्था में कामवासना }o{ गर्भावस्था के दौरान होने वाले अन्य बदलाव }o{ गर्भावस्था में स्त्री का वजन }o{ गर्भावस्था की प्रारिम्भक समस्या }o{ गर्भावस्था की तकलीफें और समाधान }o{ कुछ महत्वपूर्ण जांचे }o{ गर्भावस्था में भोजन }o{ गर्भावस्था में संतुलित भोजन }o{ गर्भावस्था में व्यायाम }o{ बच्चे का बढ़ना }o{ गर्भावस्था के अन्तिम भाग की समस्याएं }o{ प्रसव के लिए स्त्री को प्रेरित करना }o{ प्रसव प्रक्रिया में सावधानियां }o{ अचानक प्रसव होने की दशा में क्या करें }o{ समय से पहले बच्चे का जन्म }o{ प्रसव }o{ जन्म }o{ नवजात शिशु }o{ प्रसव के बाद स्त्रियों के शरीर में हमेशा के लिए बदलाव }o{ बच्चे के जन्म के बाद स्त्री के शरीर की समस्याएं }o{ स्त्रियों के शारीरिक अंगों की मालिश }o{ प्रसव के बाद व्यायाम }o{ नवजात शिशु का भोजन }o{ स्तनपान }o{ बच्चे को बोतल से दूध पिलाना }o{ शिशु के जीवन की क्रियाएं }o{ स्त्री और पुरुषों के लिए गर्भ से संबंधित औषधि }o{ परिवार नियोजन

Hot romance tips for winter season

विंटर में रोमांस के हॉट टिप्स
हर मौसम में प्यार का अपना एक अलग एहसास और अंदाज होता है। वैसे तो बारिश को प्यार का आदर्श मौसम कहा जाता है लेकिन सर्दी का मौसम भी कुछ कम नहीं। हल्की-हल्की गुलाबी ठंड के शुरु होते ही अपने हमदम की बांहों की गर्माहट में खो जाने की सुखद अनुभूति दिल-दिमाग में गुदगुद‍ी मचाने लगती है।
अपने प्यार के साथ एक ही ब्लेंककैट में सारी रात गुजार देने का प्यारा एहसास यकायक ही उत्साह और उमंग से भर देता है। हैल्दी सीजन कहे जाने वाले इस मौसम में आपका 'प्यार' भी हैल्दी हो जाता है।
कूल-कूल मौसम में अपने प्यार को जवां और खुशनुमा बनाने के लिए अपनाएं ये कुछ हॉट-हॉट टिप्स-

1 ठंड में आग जलाकर उसके पास अपने हमदम को अपनी बांहों में लें। ठंड में रोमांस का इससे अच्छा विकल्प भला क्या हो सकता है।
2 बाथ टब में गुनगुने पानी में एक साथ स्नान करें। यह आपके एक्साइटमेंट में एक नया उत्साह भर देगा।
3 अपने फेवरेट रोमांटिक सांग पर हौले हौले डांस के साथ आपके प्यार भरे स्पर्श, चुबंनों और आलिंगन से जगाएं अपने हमदम में रूमानी एहसास।
4 रात को एक ही ब्लेंककैट में सोए और अपनी शरारतों को कम न होने दें।
5 एक ही कप से गर्मागरम कॉफी का आनंद उठाएं।
6 सोने से पहले अपने हाथों को गर्म पानी से साफ करें ताकि आपने प्यार भरे स्पर्श में ठंड की चुभन का एहसास न हो।
7 ठंड के मौसम का रम, वाईन के साथ मजा लें। आपकी बॉडी को गर्म रखने के साथ ही यह आपके प्यार के लम्हों को और हसीन बना देगी।
8 सुबह जॉगिंग जैसे वर्कआउट के बाद थोड़ी देर पार्क की किसी बेंच पर हाथों में हाथ डाल कर बैठें। सुबह के इस छोटे से रोमांस की याद आपके और आपके पार्टनर के होंठों पर अचानक ही मुस्कान का कारण बन जाएगी। 

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Wednesday, 25 February 2015

Swine Flu Virus

स्वाईन फलू

 एच 1 एन 1 फलू का वायरस
1. संक्षिप्त वर्णन
स्वाईन फलू एक तरह का नया बीमारी है, जो कि साधारण सर्दी, खांसी और बुखार जैसे लक्षण देता है, लेकिन कभी कभार जानलेवा भी हो सकता है।
2.“नया बीमारी”
यह एक नये प्रकार के रोगाणु या वायरस के द्वारा फैल रहा है, जो कि सबसे पहले अप्रैल, 2009 में पहचाना गया। इसमें नयापन यह है कि इस वायरस का जीन (gene) में अनेक परिवर्तन हैं, जो कि पहले के वायरस में नहीं देखे गये हैं।
साधारण सर्दी, खांसी और बुखार सभी जानवरों और मनुष्यों में होता है। यह वायरस के कारण होता है, हो कि उनको संक्रमित करते हैं। इस वायरण के जीन में हमेशा परिवर्तन होते रहता है, जिस कारण से इसका इलाज करना मुश्किल होता है। साथ ही, इस वायरस का किसी जीव को संक्रमित करने का क्षमता बढ़ते रहता है।
बर्ड फलू (bird flu), उस वायरस को कहते हैं, जो केवल चिड़ियों में फैलता है, जैसे कि मुर्गी, बत्तख और अन्य पक्षी।
एवियन फलू (avian flu), उस वायरस को कहते हैं, जो किसी जंगली चिड़ियों में फैलता है। इसका एक प्रतिरूप को एच 5 एन 1 फलू वायरस (H5N1) कहते हैं, जो कि मनुष्यों में भी फैल सकता है। यह जानलेवा भी हो सकता है, और इसके विरुद्ध कोई टीका भी नहीं है।
स्वाईन फलू (swine flu), उस वायरस को कहते हैं, जो कि एच 1 एन 1 फलू वायरस (H5N1) है। यह सुअरों में, चिड़ियों और मनुष्यों में फैलता है। यह जानलेवा भी हो सकता है। स्वाईन फलू को “नया बीमारी” इसी कारण से कहते हैं क्योंकि इससे पहले कभी नहीं हुआ था कि फलू वायरस जानवर, चिड़िया और आदमी में एक साथ फैल रहा है।
3.  प्रकोप
11 जून 2009 को, वर्ल्ड हेल्थ ओरगनाईजेशन (world health organization) ने यह घोषित किया गया कि यह वायरस समूचे संसार में मनुष्यों में महामारी फैला रहा है। इसको पेंडेमिक (pandemic) कहा जाता है। अभी तक वैज्ञानिक, इसके विरुद्ध टीका पर काम कर रहे हैं।
4.  प्रसार
यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को फैल सकता है। यह किसी मरीज़ के छींकने से, खांसने से, हाथ न धोने से किसी दूसरे व्यक्ति को फैल सकता है। क्योंकि यह छूने से फैलता है, तो अगर आप किसी मरीज को छूते हैं या हाथ मिलाते हैं, और आप बगैर हाथ धोये, आप अपने मुंह या नाक को छूते हैं, तो आपको फलू हो सकता है।
अभी तक के रिसर्च के अनुसार, कोई मरीज़ बीमारी शुरू होने से 1 हफ्ता के बाद तक, किसी दूसरे व्यक्ति को फलू फैला सकता है।
फलू खाने से नहीं फैलता है। पोर्क (pork), सुअर के मीट को कहते हैं। स्वाईन फलू पोर्क या सुअर के मीट के खाने से नहीं फैलता है। यह ध्यान रहे कि कोई भी मीट अच्छे तरह से बना हुआ हो।
अभी तक के रिसर्च के अनुसार, सामान्य नल के पानी पीने से फलू नहीं फैलता है। ध्यान रहे कि सप्प्लाई पानी को पहले से क्लोरीन (chlorine) देकर साफ किया गया है।
5.  लक्षण
आपको किसी अन्य सर्दी के जैसा, इस बीमारी में भी बुखार, खांसी, छींकना, गले में खराश, गला दुखना, नज़ला, सिरदर्द, थकावट, ठंडा लगना और कमजोरी लग सकता है। कुछ लोगों को उल्टी और दस्त भी लग सकता है। कुछ लोगों का गंभीर बीमारी से मौत भी हो सकता है।
6.  संभावित मरीज
वैसे तो फलू किसी को हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों को अति गंभीर बीमारी हो सकता है। वो लोग हैं -
  • बूढ़े लोगों में
  • 5 साल से कम उम्र के बच्चों में
  • गर्भवती महिला में
  • कोई भी व्यक्ति को जिसे कोई अन्य गंभीर बीमारी हो, जैसे कि आस्थमा, डायबिटीज़.
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Vegetarian food during pregnancy

प्रेग्नेंरसी के दौरान शाकाहारी आहार

गर्भावस्थां के दौरान महिलाएं पशु उत्पाद और अंडे के जरिए मल्टीविटामिन/खनिज जिन की जरूरत पूरी करती हैं। लेकिन, जो महिलाएं शाकहारी होती हैं, उनके लिए जरा मुश्किल होती है। शाकाहारी महिलाएं जो सभी पशु उत्पादों से बची रहती  है, को पोषक तत्वोंर के लिए 'विटामिन-बी12', 'कैल्शियम', 'जिंक' और 'विटामिन-डी' की आवश्यकता होती है। प्रेग्नें सी के दौरान शाकाहार भी मां और बच्चे को सभी जरूरी पोषक तत्त्वक मुहैया कराते हैं।
गर्भावस्था के दौरान शाकाहारी भोजन को बनाए रखने के लिए कई सकारात्मक पहलू हैं। उदाहरण के लिए प्रोटीन के शाकाहारी स्रोत किडनी के लिए आसान होते हैं। साथ ही एक शाकाहारी दांत क्षय रोकने में मदद करता हैं जोकि प्रेग्नेंहसी के दौरान एक आम समस्याज होती है। इसके अलावा, शाकाहारी भोजन, सामान्य रूप में, निम्न स्थितियों के खतरे को कम करता है: मोटापा, हाइप्रटेंशन, कब्ज, दिल की बीमारी, टाइप 2 मधुमेह, कैंसर.
गर्भावस्था

प्रेग्नेंदसी और शाकाहारी भोजन:
सभी गर्भवती महिलाओं को अतिरिक्त लोहा, कैल्शियम, फोलेट, (जो एक शाकाहारी के रूप में प्राप्त किया जा सकता है), जिंक, प्रोटीन के रूप में आवश्यक फैटी एसिड और 200 से 300 कैलोरी पूर्व गर्भावस्था से अधिक की आवश्यकता होती है। विशेष रूप से, शाकाहारी गर्भवती को निम्नलिखित उपभोग करना चाहिए।
1. अलग-अलग तरह के ढे़र सारे फल और सब्जियां, जिससे शरीर के लिए आवश्यक सभी विटामिन मिल सकें। इनमें मौजूद विटामिन और फाइबर अत्यंत लाभप्रद हैं।
2. स्टार्च (ब्रेड, अनाजों, चावल औऱ आलू) बड़ी मात्रा में लें। रिफाइंड और परिरक्षित खाद्य पदार्थों में विटामिन और फाइबर का क्षय हो जाता है। इसलिए इनकी जगह साबुत अनाज और घर का बना ताजा भोजन लें।
3. अपने आहार में पर्याप्त प्रोटीन लेने के लिए प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ लेने चाहिए। और जो महिला शाकाहारी है उनके प्रोटीन की कमी पूरी करने के लिए ब्राउन राइस, बीन्स, बीज, मूंगफली का मक्खन और सोया उत्पाद जैसे खाद्य पदार्थ शामिल हैं। डेयरी उत्पादों अपने विशेष आहार में शामिल करे, जो प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत हैं और कैल्शियम का भी अच्छा स्रोत है।
4. अपने शरीर को गर्भावस्था के लिए तैयार करने और शिशु की वृद्धि के लिए लौह तत्वों की अत्यंत आवश्यकता होती है। स्त्रियों में एनीमिया अक्सर पाई जाने वाली समस्याओं में एक है और कई स्त्रियों में यह गर्भावस्था के दौरान पाया जाता है। इससे बचने के लिए लौह तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे-हरी पत्तेदार सब्जियां, अनाज और दालें अपने भोजन में प्रयोग करें।
5. अच्छी वसा जैसे-ओमेगा-3 की पर्याप्त मात्रा लें। यह नट, फ्लैक्स के बीज में मिलता है। शरीर के कार्यकलाप सुचारू रूप से चलाने के लिए वसा की कुछ मात्रा आवश्यक है।
6. फलों का ताजा रस पर्याप्त मात्रा में लें। फलों के ताजे रस को प्राथमिकता दें, इसमें अधिक पोषक तत्व होते हैं।

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Tuesday, 24 February 2015

Care during 15th week in pregnancy

गर्भावस्‍था के 15वें सप्‍ताह में देखभाल के टिप्‍स

गर्भावस्‍था के दौरान ही नहीं बल्कि गर्भधारण की योजना से ही महिलाओं को एहतियात बरतने शुरू कर देने चाहिए, इससे वो तो स्‍वस्‍थ रहती हैं साथ ही उनका होने वाला बच्‍चा भी स्‍वस्‍थ और स्‍वस्‍थ रहता है। गर्भधारण के पहले सप्‍ताह से लेकर 40वें सप्‍ताह (सामान्‍यतया यह प्रसव का सबसे बेहतर समय होता है) तक महिला को विशेष ध्‍यान रखना चाहिए।
गर्भावस्‍था के दौरान तीन ट्राइमेस्‍टर्स होते हैं और 15वां सप्‍ताह दूसरे ट्राइमेस्‍टर में आता है। पहले ट्राइमेस्‍टर के मुकाबले दूसरे ट्राइमेस्‍टर में महिला को थोड़ी कम समस्‍या होती है। क्‍योंकि ऐसा माना जाता है कि पहली तिमाही और तीसरी तिमाही के मुकाबले दूसरी तिमाही शांत रहती है। इसमें सुबह की बीमारी या मार्निंग सिकनेस और थकान कम होती है। इस लेख में विस्‍तार से जानिये इस सप्‍ताह में देखभाल के टिप्‍स के बारे में।
www.jkhealthworld.com/pregnancy

वजन बढ़ना
गर्भावस्‍था के 15वें सप्‍ताह में शिशु का अधिक विकास हो जाता है, इसके कारण महिला को दर्द भी महसूस होने लगता है, पेट बढ़ना भी शुरू हो जाता है। महिला के वजन में करीब पांच पाउंड की वृद्धि हो जाती है। अगर आपका वजन इससे अधिक बढ़ गया है तो चिकित्‍सक से सलाह जरूरी है।
प्रतिरक्षा प्रणाली पर असर
इस समय गर्भवती महिला की प्रतिरक्षा प्रणाली थोड़ी कमजोर हो जाती है, जिसके कारण उसे सर्दी और फ्लू का संक्रमण भी हो सकता है, ऐसे में फ्लू से बचने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए आप हमेशा हाइड्रेटेड रहें, शरीर में पानी की कमी न होने दें।
बच्चे का विकास
15वें हफ्ते में बच्चे की लंबाई लगभग चार इंच और वजन एक से पौने दो औंस के करीब होगा। बच्चा खाना निगलना शुरू कर देता है, और अच्छी बात यह है कि वह बाहर की आवाजों को भी सुन सकता है। पहली बार गर्भवती हाने वाली महिलाएं इस स्‍तर पर शिशु की हल्‍की-फुल्‍की हलचल महसूस कर सकती हैं। ऐसे में बच्‍चा गर्भाश्‍य में सक्रिय हो जाता है। बच्चे के पैर, हाथों के मुकाबले लंबे होते हैं। साथ ही शरीर भी सिर से ज्‍यादा बड़ा होता है। स्वाद ग्रंथियां विकसित हो रही होती हैं, हाथ और पैर के नाखून भी बढ़ने लगते हैं।
हल्‍के गरम पानी से नहायें
इस दौरान महिला के शरीर में दर्द की शिकायत होने लगती है। कुछ महिलाओं के वजन में तो 40 से 50 पाउंड तक का इजाफा तक हो सकता है। पेट में खिंचाव महसूस हो सकता है। गर्भाश्‍य का विस्तार होगा और ऐंठन भी होता है। शरीर में दर्द महसूस होने पर गर्म पानी से स्‍नान करने से दर्द में कमी होगी।
ढीले कपड़े पहनें
इस समय महिला के शरीर में संक्रमण की भी आशंका बढ़ जाती है। इसलिए कुछ सामान्य जीवाणु संक्रमण से सावधान रहना चाहिए। कई बार देखने में आता है कि कुछ महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान संक्रमण हो जाता है। किसी भी प्रकार के संक्रमण का लक्षण लगने पर तुरंत चिकित्‍सक से परामर्श करें। संक्रमण को रोकने के लिए साफ और ढीले-ढाले कपड़े पहने। स्विमिंग पूल या गर्म टब बाथ में ज्यादा समय गुजारने से बचें। इत्र और बॉडी स्‍प्रे का भी इस्‍तेमाल कम करें।
सोते वक्‍त ध्‍यान दें
इस समय तक बच्‍चे का विकास तेजी से हो रहा होता है, इसलिए महिला को सोते वक्‍त भी ध्‍यान देना चाहिए। हालांकि अभी आपका पेट कम है, लेकिन समय के साथ यह और बढ़ेगा। पेट कम रहने तक आप कमर के बल सो सकती हैं, लेकिन बाद में आपके लिए करवट लेकर सोना ही फायदेमंद रहेगा। पीठ पर सोने से गर्भाश्‍य के कारण दिल पर और बच्चे को रक्‍त की आपूर्ति करने वाली इनफिरियर वेन पर दबाव बढ़ सकता है। यदि आप करवट लेकर सोती हैं तो इस तरह की समस्‍या कम होगी। पैरों को ऊपर उठाने के लिए अपने घुटनों के बीच में एक तकिया रख कर सोने की कोशिश करें।
खानपान पर ध्‍यान दें
गर्भधारण करने से पहले ही महिला को खानपान पर विशेष ध्‍यान देना चाहिए, फोलिक एसिड की अतिरिक्‍त गोलियों के साथ प्रोटीनयुक्‍त डायट का सेवन करना चाहिए। 15वे सप्‍ताह तक महिला के डायट चार्ट में भरपूर मात्रा में विटामिन और प्रोटीन युक्‍त आहार की सूची होनी चाहिए।
सामान्‍य प्रसव के लिए महिला को खानपान पर विशेष ध्‍यान देने के साथ नियमित रूप से चि‍कित्‍सक से परामर्श लेने की जरूरत होती है।
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