Friday, 20 March 2015

Hormone changes after pregnancy



Pregnant होने के बाद हार्मोन्‍स के कारण पूरेशरीर में होता है बदलाव

गर्भधारण करने के बाद स्त्री का शरीर कई बदलावों से गुजरता है। स्त्री के शरीर में बदलाव हार्मोन में परिवर्ततन के कारण होते हैं। pregnancy के बाद स्त्री की त्‍वचा, हाथ, पैर, नाखून सहित लगभग पूरे शरीर पर बदलाव दिखते हैं। साथ ही इस दौरान स्त्री को कई प्रकार की जटिलताओं से भी गुजरना पड़ता है।
वैसे तो आप उन सभी बदलावों को महसूस कर सकती हैं लेकिन कई बदलाव ऐसे भी होते हैं जिनके बारे मे आपको कोई जानकारी नही होती। ज़रूरी नहीं कि सभी गर्भधारण करने वाली स्त्रीओं मे एक जैसे बदलाव आयें। यह बदलाव अलग भी हो सकते हैं। बल्कि कुछ स्त्रीयें इन बदलावों को महसूस भी नही करतीं। इन दिनों आप अपने गर्भ मे पल रहे बच्चे की कुछ हरकतों से भी वाकिफ़ होती हैं। प्रेगनेंसी के दौरान आपके शरीर में इस प्रकार के बदलाव दिखते हैं।

Pregnancy और शारीरिक बदलाव

स्तनों में सूजन

http://www.jkhealthworld.com/hindi/मनचाही-संतान
प्रेगनेंट होने के बाद स्तनों मे सूजन आना लाज़मी है बल्कि यह कहा जाए कि स्तनों मे सूजन आना प्रेगनेंट होने का पहला संकेत है तो ग़लत नही होगा। प्रेगनेंट होने के बाद स्त्रीओं के स्तनों का साइज़ बढ़ने लगता है और सूजन भी आ जाती है। आपके ब्रेस्ट टेंडर पड़ने के साथ साथ हल्की सरसराहट होने लगें तो यह सब मासिक साइकल के कारण होता है और ब्रेस्ट का साइज़ बढ़ने बढ़ता है। स्तनों पर सूजन हॉर्मोन्स, प्रोजेस्टेरोन तथा एस्‍ट्रोजन के लेवल के बढ़ जाने के कारण आती हैं। यही नहीं आपकी प्रेग्नेन्सी के आख़िर तक भी आपके स्तनों का विकास होना जारी रहता है।

बालों के टेक्सचर में बदलाव

प्रेग्नेन्सी के दौरान स्त्रीओं के बालों की ग्रोथ के साथ साथ उनके टेक्सचर में भी काफ़ी बदलाव दिखते हैं। यह सब प्रेग्नेन्सी के दौरान स्त्रीओं मे आए हॉर्मोनल बदलाव के कारण होता है, इसको एस्ट्रोजन नामक हॉर्मोन प्रभावित करता है। जिसके बढ़ने से बाल या तो ज़्यादा बढ़ने लगता हैं या फिर ज़्यादा गिरने लगते हैं। बच्चे को जन्म देने के बाद ये साइकल सामान्य हो जाते हैं। लेकिन डिलीवरी के बाद कई स्त्रीओं को हेयर फॉल की शिकायत रहती है। क्योंकि ऐसे मे पहले ही बढ़े हुए बालों का बढ़ना रुक जाता है और वह सब एक साथ गिरने लगते हैं।

नाखूनों में बदलाव आना

प्रेग्नेन्सी के दौरान शरीर मे होने वाले हॉर्मोनल बदलाव के कारण नाखून बहुत तेज़ी से बढ़ते हैं कभीकभी यह रूखे और सख़्त भी हो जाते हैं। गर्भावस्था में नाखूनों के टेक्सचर में भी बदलाव आ जाता है, लेकिन डिलीवरी के बाद यह अपनी सामान्य स्थिति में आ जाते हैं।

त्‍वचा में बदलाव आना

प्रेगनेंसी के कारण आपकी त्‍वचा में भी बदलाव आते हैं, आम तौर पर इस दौरान pregnant स्त्रीओं के चेहरे पर काफ़ी ग्लो आ जाता है साथ ही उन्हे स्किन से सम्बन्धित कई समस्यायें भी होती हैं। इनमें च्लोआस्मा तथा प्रेगनेंसी मास्क प्रमुख हैं, इससे चेहरे पर छोटे भूरे दाग पड़ने लगते हैं। चेहरे पर पड़ने वाले दागों से बचने के लिए आप सनस्क्रीन इस्तेमाल कर सकती हैं साथ ही कोशिश करें कि धूप मे कम से कम निकलें। इसके अलाव मुहांसे भी होने लगते हैं।

स्ट्रेच मार्क्स

प्रेगनेंट स्त्रीओं को अक्सर स्ट्रेच मार्क्स का सामना करना पड़ता है यह स्ट्रेच मार्क्स पेट के हिस्से पर, थाई, बाहं आदि जगह पड़ते हैं। pregnant होने क बाद स्त्री का पेट बाहर की तरफ निकलता है, साथ ही त्‍वचा में सूजन भी आ जाती है। प्रसव के बाद सूजे हुए स्किन के कारण स्‍ट्रेच मार्क्‍स की समस्‍या होती है। हालांकि ये समस्‍या समय के साथ समाप्‍त हो जाती है लेकिन इससे निजात पाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

Thursday, 19 March 2015

गर्भावस्था को प्रभावित कर सकता है उच्च रक्तरचाप

गर्भावस्था को प्रभावित कर सकता है उच्च रक्तरचाप

Pregnancy में उच्चा रक्तचाप सबसे आम समस्या है। Pregnancy के दौरान हाई ब्लेड प्रेशर का सीधा प्रभाव स्त्री और भ्रूण पर पड़ता है।
Pregnancy के दौरान उच्चर रक्तचाप की समस्या स्त्रिओं के लिए खतरनाक हो सकता है। Pregnancy के दौरान ब्ल्ड प्रेशर अधिकतर तनान के कारण होता है।
आमतौर पर देखा जाता है कि गर्भावस्था में स्त्रिओं में उच्च रक्तचाप अगर मां बनने के बाद ठीक हो जाए तो इसका कोई दीर्घकालिक प्रभाव नहीं होता है। 

Pregnancy में उच्च  रक्तचाप

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Pregnancy में यदि हाई ब्लरड प्रेशर की समस्या लंबे समय से हो तो यह दीर्घकालिक उच्च रक्तचाप या क्रॉनिक हाइपरटेंशन कहलाता है। यदि हाई ब्लरड प्रेशर की समस्या  pregnancy के 20 सप्ताह बाद, प्रसव में या प्रसव के 48 घंटे के भीतर होता है तो यह प्रेग्नेंसी इड्यूस्ड हाइपरटेंशन कहलाता है। इस दौरान यदि रक्तचाप 140/90 या इससे अधिक है तो स्त्री और बच्चे दोनों को परेशानी हो सकती है। इससे मरीज एक्लें प्शिया में पहुंच सकता है, यह एक प्रकार की जटिलता है जिसमें स्त्री को झटके आने शुरू हो जाते हैं।
स्त्रिओं में pregnancy के हाई ब्ल ड प्रेशर की समस्यां बहुत देखी जाती है। भ्रूण के विकास के साथ यह समस्यां गंभीर होती जाती है। Pregnancy के दौरान यदि भोजन में पौष्टिक खाद्य पदार्थों का अभाव है तो स्त्रियां खून की कमी का शिकार होती हैं। शरीर में खून की कमी से फीटस का विकास रुक जाता है। इससे मिसकैरेज होने की संभावना भी बनी रहती है।
Pregnancy के दौरान हाई ब्लमड प्रेशर तीन प्रकार का होता है- क्रोनिक हाइपरटेंशन, गेस्टेचशनल हाइपरटेंशन और प्रीक्लेंदप्शिया। 

Pregnancy में हाई ब्लयड प्रेशर के खतरे  

  • Ppregnancy के दौरान उच्च् रक्त चाप के कारण बच्चेत का विकास बाधित हो सकता है। बच्चेr के लिए जरूरी विटामिन और प्रोटीन नही मिल पाता। इसका असर होने वाले बच्चेि के वजन पर भी पड़ता है। 
  • हाइपरटेंशन के कारण गर्भनाल को नुकसान हो सकता है। कुछ मामलों में गर्भनाल गर्भाशय से अलग हो जाता है। इसके कारण बच्चेो की ऑक्सीमजन की आपूर्ति बाधित होती है। स्त्री को रक्तणस्राव भी हो सकता है।
  • Pregnancy के दौरान हाई ब्ल ड प्रेशर से समय से पूर्व डिलीवरी होने की संभावना बढ़ जाती है। 
  • यदि स्त्री को pregnancy के दौरान हाई ब्लवड प्रेशर की समस्याढ है तो प्रसव के 20 सप्ताैह बाद हृदय की बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है। 
  • Pregnancy के दौरान उचित खानपान और नियमित चेकअप के जरिए इसकी जटिलताओं को कम किया जा सकता है। यदि आपको इस दौरान हाइपरटेंशन के लक्षण दिखें तो चिकित्सतक से तुरंत संपर्क कीजिए।

Amazing benefits of Pregnancy

Pregnancy के आश्चलर्यजनक लाभ

Pregnancy के दौरान स्त्री का शरीर कई बदलावों से गुजरता है लेकिन अनेक परेशानियों के बाद pregnancy के कई आश्च र्यजनक लाभ भी होते हैं जो हार्मोन में बदलाव के कारण होता है। गर्भावस्था के दौरान शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के बदलाव होते हैं।
Pregnant होने के बाद स्त्री के कुछ सामान्य  लक्षण दिखते हैं, जैसे - वजन बढ़ना, मॉर्निंग सिकनेस, मितली आना, अटपटा खाने की इच्छास आदि। Pregnancy के बाद ऐसे परिवर्तन सामान्य, हैं। आइए हम आपको pregnancy के कुछ आश्चार्यजनक लाभों के बारे में बताते हैं जिनके बारे में आप नही जानते।

Pregnancy के आश्चर्यजनक लाभ

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मानसिक स्वस्थता   
प्रेग्नेंवट होने के बाद मॉर्निंग सिकनेस, थकान, स्ट्रेेच मार्क्सं, लेग क्रैंप्स  जैसी समस्या यें होती हैं, लेकिन इन तकलीफों के बाद भी स्त्री को मानसिक रूप से मजबूत बनती है। न्यूटयार्क की कोलंबिया यूनिवर्सिटी द्वारा किये गये एक शोध के मुताबिक, 'pregnancy के दौरान मतली, थकान जैसी समस्या्ओं के बावूजद भी दूसरे और तीसरे ट्राइमेस्टgर में स्त्रीयें खुद को ज्यायदा ऊर्जावान महसूस कर रही थीं।'
यौन इच्छाम का बढ़ना 
Pregnant होने के बाद स्त्रीओं में यौन संबंध बनाने की इच्छाे प्रबल हो जाती है। pregnancy के दौरान यौन संबंध बनाने के कई फायदे होते हैं। यदि दूसरी तिमाही में यौन संबंध बनाया जाये तो गर्भाशय के आस-पास के क्षेत्र में रक्तस संचार अच्छें से होता है। कुछ स्त्रीओं को इस समय यौन संबंध बनाने में चरम आनंद मिलता है। इसके अलावा pregnancy के दौरान यौन संबंध बनाना एक अच्छा  व्यादयाम भी है।
स्वास्थ्य बनाये रखने की चाहत 
Pregnant होने के बाद स्त्री को अतिरिक्तध देखभाल की जरूरत पड़ती है, इसलिए स्त्री खान-पान और दिनचर्या के प्रति ज्याादा सजग हो जाती है। pregnancy के बाद स्त्री को ज्यािदा पोषणयुक्तम आहार खाना जरूरी होता है। इसके साथ ही नियमित रूप से जांच भी जरूरी हो जाता है। pregnancy के दौरान धूम्रपान और शराब पीने जैसी बुरी आदतें छूट जाती हैं और यही आदत बाद में भी बनी रहती है। जिसके कारण प्रसव के बाद भी स्त्री अपने स्वाआस्थ  के प्रति जागरुक रहती है।
कैंसर का खतरा कम होना
जो स्त्री pregnant होती है उसे स्त न और डिंबग्रंथि (ओवेरियन) कैंसर के होने का खतरा कम होता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कू ल द्वारा कराये गये अध्य यन में यह बात सामने आयी है कि तीन महीने से ज्याैदा स्तिनपान कराने वाली स्त्रीओं को कैंसर (खासकर ब्रेस्टय कैंसर) होने की संभावना कम होती है।
इंद्रियो में बदलाव
Pregnancy में हार्मोंस में बदलाव के कारण इंद्रियो में भी बदलाव होता है। pregnant स्त्री की सूंघने क्षमता बढ़ जाती है। स्त्री की स्वा द लेने वाली ग्रंथि भी प्रभावित होती है। एस्ट्रो जन हार्मोन के कारण सूंघने की क्षमता बढ़ती है।
आत्माविश्वा्स बढ़ना 
Pregnancy के दौरान स्त्री का कांफिडेंस का स्त र बढ़ जाता है, pregnancy को 'यूनीक कांफीडेंस बिल्डaर' भी कहा जाता है। Pregnancy के दौरान स्त्रीयें कई प्रकार के घरेलू कामकाज करती हैं जिससे उनकी काम करने की क्षमता बढ़ती है।
Pregnancy के दौरान होने वाले परिवर्तनों और जटिलतओं के अलावा भी गर्भधारण करना अपने आप में अच्छा  एहसास है। लेकिन pregnancy के दौरान होने वाले किसी भी परिवर्तन के बारे में अपने चिकित्स क से सलाह अवश्यह लें।

Tuesday, 17 March 2015

Mango, Orange and Apple fruits are useful for pregnant woman

गर्भवती स्त्री के लिए लाभकारी हैं आम, सेब और संतरे जैसे फल

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को संतुलित भोजन करने की सलाह दी जाती है। गर्भावस्था के दौरान आप के आहार में विटामिन, कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन इत्यादि की मात्रा भरपूर होनी चाहिए। गर्भावस्था के दौरान फल और उनका जूस लेने की खास सलाह दी जाती है, जिससे गर्भवती महिला को पोषण मिल सकें।
गर्भवती महिलाओं के लिए फलों को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है, चाहे बात ताज़े फलों की हो या ड्राई फ्रूट्स की। फलों में भरपूर मात्रा में विटामिन, कैल्शियम और आयरन होता है। मौसमी फल गर्भावस्था में बहुत अधिक फायदा करते हैं। आइए जानें गर्भवती महिलाओं के लिए फल कौन-कौन से खास उपयोगी हैं।
फलों के फायदे
  • http://www.jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8कुछ गर्भवती महिलाएं फलों को खाने के बजाय जूस लेना अधिक पसंद करती हैं, हालांकि जूस भी बहुत फायदेमंद होता हैं, लेकिन आप फलों को बगैर रस निकाले खाएंगी तो आपको ये अधिक लाभ देंगे।
  • गर्भवती महिलाओं के लिए खुराक बढ़ाने का मतलब शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों को ज्यादा तथा इनके साथ टोटल कैलोरी की मात्रा को थोड़ा ही बढ़ाना चाहिए। बहुत से ऐसे फल हैं जो पौषक तत्वों की कमी को दूर करते हैं।
  • सन्तरा, अंगूर, आम, पपीता जैसे मौसम के फलों में खनिज लवण या विटामिन होते हैं जो गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को फिट रखते हैं और शरीर में खून की कमी को दूर करते हैं।
  • गर्भवती महिलाओं को आंखो के लिए 'विटामिन ए', बालों और दांतों और हडि्डयो के लिए कैल्शियम के अलावा 'विटामिन सी' की खास जरूरत होती हैं। ऐसे में उन्हें 'विटामिन ए' से भरपूर फल आम, पपीता, गाजर और विटामिन सी के स्रोत वाले फल आंवला, अमरूद, सन्तरा इत्यादि को लेना चाहिए। 'विटामिन सी' वाले फलों को दिन में दो से तीन बार भी लिया जा सकता है।
  • गर्भवती महिलाएं फलों के साथ-साथ ताकत बढ़ाने और मस्तिष्को को तेज करने वाले ड्राई-फूट्स जैसे- बादाम, काजू, किशमिश, अखरोट इत्याोदि भी ले सकती हैं। ये शिशु के पूर्ण विकास के लिए भी बहुत महत्वू्पर्ण होते हैं
  • कैल्शियम, विटामिन और प्रोटीन से भरपूर फल
  • गर्भावस्था के दौरान लिए जाने वाले फल जिनमें प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन और अन्य पोषक तत्व मौजूद होते हैं।
  • http://www.jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8अनन्नास- कैल्शियम, पोटैशियम, विटामिन ए और सी, और फॉस्फोरस से भरपूर फल है।
  • सेब-क्लोरिन, तांबा, लोहा, मैगनीशियम, मॅन्गनीज तथा फोलिक ऐसिड सेब में पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।
  • पपीता-कैलशियम, क्लोरिन, लोह, पपेन, विटामिन सी और ए से भरपूर है।
  • संतरा-कैल्शियम, क्लोरिन, कॉपर, फ्लोरिन, लोहा, मॅन्गनीज, विटामिन बी1 और सी भरपूर है।
  • नाशपाती-फॉस्फोरस, विटामिन ए, विटामिन बी 1, बी 2, और पोटैशियम पाया जाता है।
  • स्ट्रॉबेरी-इसमें कैलशियम, लोहा, फॉस्फोरस, विटामिन सी और फायबर है।
  • ख़रबूज़ा-विटामिन ए, सी और बी कॉम्प्लेक्स सही मात्रा में पाए जाते हैं।
  • अंगूर-कैल्शियम, क्लोरिन और लोहा हैं।
  • तरबूज़-बहुत भारी मात्रा में खनिज पदार्थ, विटामिन और करीब नब्बे प्रतिशत पानी है।
  • आम-विटामिन ए, ई और सी, लोह से भरपूर है।
  • केला-पोटैशियम, सोडियम, फॉस्फोरस, विटामिन ए, बी1, बी1 और विटामिन सी होते हैं।
  • जामुन-आयरन, विटामिन सी और ए की प्रचुर मात्रा है।

जन्म के बाद छह महीने तक स्तेनपान बच्चे के लिए है सबसे पोषक आहार

जन्म के बाद छह महीने तक स्तेनपान बच्चे के लिए जरूरी


अक्सर देखा गया है कि डिलीवरी के बाद मां का खान-पान का ध्यान नहीं रखा जाता जो न केवल मां बल्कि बच्चे दोनो के लिए ही उचित नहीं है। प्रसव के बाद भी मां को स्वोस्थ  आहार की जरूरत होती है क्योंकि प्रसव के बाद मां का शरीर कमजोर होता है और उसे स्त नपान भी कराना होता है जो बच्चे के लिए सबसे उचित आहार है।
http://www.jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%81-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8प्रसव के समय खून का अधिक स्राव होता है इसलिए प्रसव के बाद मां को अधिक पोषणयुक्त  आहार लेना चाहिए। मां को खाने में ताजे फल और हरी सब्जियों के साथ-साथ साबुत अनाज और दालें खाना चाहिए। इसके साथ ही मां को बच्चे  के पोषण का भी ध्याकन रखना पड़ता है। जैसे ही बच्चाे 6 महीने का होता है स्त‍नपान के अलावा उसे अन्यो पूरक आहार भी देना शुरू कर देना चाहिए।
छह महीने तक
बच्चे के जन्म से लेकर अगले 6 महीने तक मां का दूध ही सबसे अच्छा आहार है क्योंकि मां का दूध बच्चे के पोषण की सभी जरूरतों को पूरा करता। स्तनपान करने वाले बच्चे दूध पीने के हर दो से तीन घंटे के बाद भूख महसूस करते हैं क्योंकि मां का दूध आसानी से पच जाता है जबकि दूसरे स्रोत पर पले बच्चों को जल्दी भूख महसूस नहीं होती। यदि बच्चे के जन्म के पहले हफ्तों में वजन नहीं बढ़ता है तो आपको बच्चे को बार-बार खिलाना चाहिए।   
छह महीने बाद
छह महीने के बाद आप अपने बच्चें को स्तनपान के साथ उसे अर्द्ध ठोस आहार देना शुरू कर सकते हैं। इस दौरान बच्चेब को दाल का पानी पिला सकते हैं। दाल के पानी में विटामिन और कैल्शियम होता है जो बच्चेच के विकास के लिए जरूरी है।
कब दें ठोस आहार
ठोस आहार की शुरुआत का समय हर बच्चे में भिन्न हो सकता है। यदि बच्चे को दूध पिलाने के बीच में भूख लगने लगे और निगलने लगे, साथ ही आपको लगे कि वह ठीक से पचाने में सक्षम है तो आप यह जान जाऐंगे कि अपका बच्चा अर्द्ध ठोस के लिए तैयार है। नए खाद्य पदार्थों की शुरुआत के साथ स्तनपान की आदत को बदलना नहीं चाहिए। अर्द्ध ठोस आहार मैश्ड या शोरबे के रूप में होना चाहिए। शिशुओं को एक घटक वाली दाल भी दी जा सकती है। अपने बच्चे को खिलाना एक झंझट वाला काम हो सकता है जिसमें अधिकतर खाना बच्चे के खाने की बजाय उस पर गिर सकता है।
http://www.jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%81-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8बच्चे के विकास के साथ खिलायें
बच्चे को खिलाते समय एक बिब का प्रयोग करें और खिलाने के लिए एक छोटे से चम्मच का ध्यान रखें। बच्चेम को जल्दीग में न खिलायें, बल्कि उसे आराम से धीरे-धीरे खिलायें। शुरू में वह केवल कुछ चम्मच खाना ही खाएगा या उसे खाने के लिए भी मना कर सकता है। बच्चे पर खाने के लिए दबाव न डालें इसके बजाय कुछ दिनों के बाद कोशिश करें। छह महीने की उम्र तक आपके बच्चे को दूध पीने के साथ तीन बार भोजन देना शुरू करना चाहिए। आप अपने बच्चे को फल और सब्जियां देना शुरू कर सकते हैं।
छह से नौ महीने के बच्चे
बच्चे के सात से आठ माह का होने पर आप जो भोजन उसे दे रहे हैं उसकी बनावट बदल सकते हैं। इस दौरान बच्चेा को दलिया भी दिया जा सकता है। नौ महीने तक बच्चा् हल्के  खाने को आसानी से पचा सकता है। लकिन ध्याआन रहे इस दौरान ज्याैदा गरिष्ठन और मसालेदार आहार बिलकुल न दें।
नौ महीने से एक वर्ष 
अपने बच्चे को दिन में तीन बार भोजन खिलाना जारी रखें। जब आपका बच्चा एक वर्ष का हो जाए तो आप अपने बच्चे को गाय का दूध भी पिला सकते हैं। अपने बच्चे को सभी स्वस्थ भोजन के विकल्प उपलब्ध कराएं और उसे अपने आप खाने के लिए प्रोत्साहित करें और इस समय आप उसकी निगरानी कर सकते हैं। ठोस आहार खाने से आपके बच्चे को प्यास अधिक लग सकती है। उसके एक वर्ष का होने के बाद एक सिपर लेने का विचार कर सकते हैं।