Monday, 2 March 2015

Pregnancy diet chart, proteins, calcium

गर्भावस्था के दौरान आहार में कौन से चीजे लेना चहिए और कितनी मात्रा में लेना चाहिए इसकि अधिक जानकारी निचे दि गयीं है।

1. प्रोटीन (Proteins)
  1. गर्भवती महिला को आहार मे प्रतिदिन 60 से 70 ग्राम Proteins मिलना चाहिए।
  2. गर्भवती महिला के गर्भाशय, स्तनों तथा गर्भ के विकास ओर वृद्धि के लिये Proteins एक महत्वपूर्ण तत्व है।
  3. अंतिम 6 महीनो के दौरान करीब 1 किलोग्राम Proteins की आवश्यकता होती है।
  4. Protein युक्त आहार मे दूध और दुध से बने व्यंजन, मूंगफली, पनीर, चिज़, काजू, बदाम, दलहन, मांस, मछली, अंडे आदि का समावेश होता है।    
2. कैल्शियम (Calcium)
  1. गर्भवती महिला को आहार मे प्रतिदिन 1500 -1600 मिलीग्राम Calcium मिलना चाहिए।
  2. गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु की स्वस्थ और मजबूत हड्डियों के लिये इस तत्व कि आवश्यकता रहती है।
  3. Calcium युक्त आहार में दूध और दूध से बने व्यंजन, दलहन, मक्खन, चीज, मेथी, बीट, अंजीर, अंगूर, तरबूज, तिल, उड़द, बाजऱा, मांस आदि का समावेश होता है।
3. फोलिक एसिड (Folic Acid)
  1. पहली तिमाही वाली महिलाओं को प्रतिदिन 4 mg Folic Acid लेंने की आवश्यकता होती है। दूसरी और तीसरी तिमाही मे 6 mg Folic Acid लेंने की आवश्यकता होती है।
  2. पर्याप्त मात्रा में Folic Acid लेने से जन्मदोष और गर्भपात होने का खतरा कम हो जाता है। इस तत्व के सेवन से उलटी पर रोक लग जाती है।
  3. आपको Folic Acid का सेवन तब से कर लेना चाहिए जब से आपने माँ बनने का मन बना लिया हो।
  4. Folic Acid युक्त आहार मे दाल, राजमा, पालक, मटर, मक्का, हरी सरसो, भिंड़ी, सोयाबीन, काबुली चना, स्ट्रॉबेरी, केला, अननस, संतरा, दलीया, साबुत अनाज का आटा, आटे कि ब्रेड आदि का समावेश होता है। 
4. पानी (Water)
  1. गर्भवती महिला हो या कोई भी व्यक्ति, पानी हमारे शरीर के लिये बहुत महत्वपुर्ण है। गर्भवती महिलाओ को अपने शरीर कि बढ़ती हुईं आवश्यकताओं को पुरा करने के लिये प्रतिदिल कम से कम 3 लीटर (10 से 12 ग्लास) पानी जरुर पीना चाहिए। गर्मी के मौसम में 2 ग्लास अतिरिक्त पानी पीना चाहिए। 
  2. हमेशा ध्यान रखे कि आप साफ़ और सुरक्षीत पानी पी रहे है। बाहर जाते समय अपना साफ़ पानी साथ रखे या अच्छा बोतलबंद पानी का उपयोग करे। 
  3. पानी की हर बूंद आपकी गर्भावस्था को स्वस्थ और सुरक्षित बनाने मे सहायक है।
5.  विटामिन (Vitamins)
  1. सगर्भावस्था के दौरान Vitamins कि जरुरत बढ़ जाती है।
  2. आहार ऐसा होना चाहिए कि जो अधिकधिक मात्रा मे calories तथा उचित मात्रा में Proteins के साथ Vitamins कि जरुरत कि पूर्ति कर सके।
  3. हरी सब्जियां, दलहन, दूध आदि से Vitamin उपलब्ध हो जाते है।
6. आयोडीन (Iodine)
  1. गर्भवती महिलाओ  के लिये प्रतिदिन 200-220 माइक्रोग्राम Iodine कि आवश्यकता होती है।
  2. Iodine आपके शिशु के दिमाग के विकास  के लिये आवश्यक है। इस तत्व की कमी से बच्चे मे मानसिक रोग, वजन बढ़ना और महिलाओ मे गर्भपात जेसी अन्य खामिया उत्पन्न होती है।  
  3. गर्भवती महिलाओ को अपने डॉक्टर कि सलाह अनुसार Thyroid Profile जॉंच कराना चाहिए।
  4. Iodine के प्राकृतिक स्त्रोत्र है अनाज, दालें, ढूध, अंड़े, मांस। Iodine युक्त नमक अपने आहार मे Iodine शामिल करने का सबसे आसान और सरल उपाय है। 
 7.  झींक (Zinc)
  1. गर्भवती महिलाओ  के लिये प्रतिदिन 15 से 20 मिलीग्राम Zinc कि आवश्यकता होती है।
  2. इस तत्व कि कमी से भूख नहि लगतीं, शारीरिक विकास अवरुद्ध हो जात्ता है, त्वचा रोग होते है।
  3. पर्याप्त मात्रा में शरीर को Zinc कि पूर्ति करने के लिए हरी सब्जिया और Multi-Vitamin supplements ले सकते है।
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Sunday, 1 March 2015

Precaution in exercise during pregnancy


गर्भावस्था के दौरान पेट के लिए एक्सरसाइज में सावधानियां
मां बनना किसी भी महिला के लिए एक सुखद एहसास है, माँ बनना प्रसव-के-बाद-व्यायामयानि एक नई दुनिया में प्रवेश करना। नई जिम्मेदायों से रु-ब-रु होना, लेकिन इस नई दुनिया में प्रवेश करने से पहले यह ज़रूरी है की गर्भावस्था के दौरान महिला अपनी उचित देखभाल करे ताकि न केवल बच्चा स्वस्थ पैदा हो बल्कि जच्चा भी अपने इस अनुभव का आनंद ले। आइये जानें गर्भावस्था के दौरान ऐसे कौन से व्यायाम किए जा सकते हैं, जिससे की प्रसव में परेशानी नहीं हो। पेट के लिए कसरत कौन-कौन सी करें।
प्रसव-के-बाद-व्यायाम
प्रसव के बाद व्यायाम
गर्भावस्था के दौरान एक्सरसाइज में सावधानियांगर्भावस्था के दौरान टहलने, साइक्लिं ग और प्रशिक्षित शिक्षक की देखरेख में योगाभ्यास किया जा सकता है।
गर्भावस्था में व्यायाम करने से पहले ज़रूरी है आप अपने डॉक्टर की सलाह लें और यह जानें कि कौन सा व्यायाम आपको सूट करेगा।
सुरक्षित उदर कसरत के दौरान कभी भी पैरों पर दवाब नहीं आने दें।
पहली तिमाही के बाद ऐसे व्यायाम से बचें जिन में पीठ के बल लेटने की ज़रुरत होती है क्योंकि इससे आपको और आपके बच्चे तक ऑक्सीजन पहुँचने में दिक्कत हो सकती है।
पेट के लिए कसरत
पेट का संकुचन- इस कसरत को करने के लिए तकिए या बॉल की आवश्यकता पड़ती है। बॉल के सहारे लेट जाएँ, गहरी सांस लें ताकि आपकी छाती और पेट में हवा पूरी तरह भर जाये। फिर धीरे-धीरे हवा को निकाल दें। ऐसा करने से पेट में संकुचन नहीं होगा।
प्रसव-के-बाद-व्यायाम
प्रसव के बाद व्यायाम
पेडू को हिलाना-अपने हाथों और घुटनों के सहारे शरीर को संतुलित करें। अब पेट की मांसपेशियों को संकुचित कर पेडू को तिरछा करें। इस प्रक्रिया में इस बात का खास ख्याल रखें कि पीठ कर्व न हो। इस मुद्रा में कुछ सेकण्ड तक रहें।
बगल में झुकना-अपने हाथों और घुटनों के सहारे शरीर को संतुलित करें। अब शरीर को धीरे-धीरे बायीं और दायीं तरफ घुमाएँ।
रोल बैक-ज़मीन पर चौकड़ी मार कर बैठें। अब जितना आप पीछे जा सकती हैं उतना पीछे जाएँ। कुछ देर रुकें फिर वापस आयें। अगर ज़रुरत पड़े तो सहारे के लिए अपने हाथों को या तो घुटनों पर रखें या फिर ज़मीन पर।
व्यायाम के लाभ
  • व्या‍याम से पीठ दर्द में भी राहत मिलती है ।
  • कब्ज की शिकायत रहने वाली महिलाओं के लिए भी व्यायाम अच्छा है ।
  • व्यायाम करने से रक्तसंचार की समस्या नहीं रहती।
  • आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान महिला सारे घरेलू काम तो करती हैं, लेकिन उनका नियमित हल्के-फुल्के व्यायाम करने पर ध्यान नहीं जा पाता। गर्भावस्था में स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है कि हल्का-फुल्का व्यायाम ऐसा नहीं है कि आप न कि घरेलू कामकाज को ही व्यायाम

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nausea symptoms occurs during pregnancy

गर्भावस्था के पहले हफ्ते में लक्षण 
Symptoms in pregnancy
 
किसी भी महिला का गर्भवती होना और मां बनना सबसे सुखद अनुभव होता है। आमतौर पर गर्भधारण के बाद पहले या दूसरे हफ्ते में कम ही महिलाओं को इसका अंदाजा होता है कि वे गर्भवती हैं।
गर्भावस्था के पहले हफ्ते में लक्षण
गर्भावस्था के पहले हफ्ते में लक्षण
गर्भधारण के बाद महिला गर्भावस्था के विभिन्न चरणों से गुजरती है। प्रारंभिक चरणों में गर्भावस्था की स्थिति का पता नहीं चलता, लेकिन डॉक्टर से बीच-बीच में जांच कराने या गर्भधारण करने की संभावना होने के बाद इस स्थिति और गर्भावस्था के शुरूआती लक्षणों को पहचाना जा सकता है। इस लेख के जरिए हम बात करते हैं प्रेग्नेंूसी के लक्षणों और गर्भावस्था के पहले सप्तााह के बारे में।
पहले सप्ता्ह के लक्षण
  • स्वस्थ महिला को प्रतिमाह माहवारी निश्चित समय या उसके आसपास होती है, लेकिन गर्भधारण के पहले लक्षण में माहवारी आनी बंद हो जाती है।
  • गर्भधारण के प्रारंभिक लक्षणों में जी मिचलाना, उल्टी होना, बार-बार पेशाब जाना, आदि भी शामिल है।
  • माहवारी के 14 दिन बाद ओवुलेशन का समय शुरू होता है। यह समय गर्भधारण के लिए बेहतर होता है।
  • गर्भधारण के बाद हार्मोंन परिवर्तन होने लगते हैं, जिससे गर्भवती महिला के व्यवहार में उतार-चढ़ाव आना शुरू हो जाता है।
  • गर्भावस्था में उल्टियां आना एक विशेष लक्षण है। बार-बार उल्टियां आने और गर्भधारण की शंका होने पर एंटीबायोटिक लेने से अच्छाा है कि डॉक्टर की सलाह लें।
  • गर्भधारण के बाद अक्सरा थकान रहने की शिकायत होने लगती है। सिर दर्द रहने लगता है, शुरूआती दिनों में पैरों पर सूजन दिखाई पड़ने लगती है।
  • गर्भावस्था का प्रारंभिक दौर एक माहवारी के पूरा होने से दूसरी महावारी के शुरू होने के बीच का होता है। यानी पहली महावारी के अंतिम दिन से दूसरी महावारी तक गर्भधारण हुए 28 दिन मान लिए जाते हैं। हालांकि यह तय नहीं है, लेकिन आमतौर पर गर्भधारण की प्रक्रिया में यही फॉर्मूला अपनाया जाता है।
गर्भधारण के बाद आहार
  • गर्भधारण के बाद गर्भवती महिला के खान-पान में तुरंत बदलाव कर देना चाहिए। अब उसे अपने लिए नहीं बल्कि अपने गर्भ में पल रहे भ्रूण के लिए भी खाना है।
  • गर्भधारण के तुरंत बाद यानी प्रारंभिक चरण से ही मदिरापान, नशीले पदार्थों का सेवन आदि बंद कर देना चाहिए।
  • डॉक्टर से संपर्क कर अपनी खाने-पीने की आदतों और अन्य दिनचर्या जैसे रहन-सहन आदि के बारे में बात करनी चाहिए, ताकि डॉक्टर आको सही सलाह दे पाएं।
  • अपने आहार में विटामिन, प्रोटीन और कैलोरी की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए। लेकिन ध्यान रहे विटामिन ई और सी की मात्रा कितनी ली जाए इस बारे में डॉक्टर से परामर्श कर लें।
  • गर्भधारण के बाद शुरूआत में विटामिन बी यानी फोलिक एसिड का सेवन करें। इस विटामिन को लेने से होने वाले बच्चे में जन्मजात दिमाग और रीढ़ की हड्डी में खराबी होने से बचा सकता है। हालांकि डॉक्टर से भी सलाह लेनी चाहिए कि क्या आप उचित मात्रा में इस विटामिन का उपयोग कर रही हैं।
  • इसके अलावा भूख न लगने पर भी थोड़ा-थोड़ा खाते रहना चाहिए, जिससे बच्चे को भरपूर पोषण मिलता रहे और आप डॉक्टर से अपना डाइट चार्ट बनवा सकती हैं।
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Saturday, 28 February 2015

How to know your love

कैसे जानें कि वह आपसे प्यार करता है
जी हां प्यार में ऐसा अक्सर होता है। हम नहीं जान पाते कि कि हमारा पार्टनर हमें चाहता है या नहीं। शंका होती है कभी-कभी, कहीं वह टाइम पास तो नहीं कर रहा। न आप खुलकर पूछ पाते हैं, न कह पाते हैं- प्यार की बात। तब आप अपने प्रिय के हाव-भाव, उसकी अदाओं, उसके व्यवहार और बातों में संकेत ढूंढते हैं। ताकि आप अनुमान लगा सकें कि सामने वाला आपके इश्क की गिरफ्त में हैं या नहीं।
 गर्भावस्थाजयेश से ममता की मुलाकात को छह माह गुजर गए हैं। ममता को जयेश का साथ अच्छा लगता है। दोनों डेट पर भी तकरीबन हर सप्ताह ही जाते हैं। बावजूद इसके ममता को यह दुविधा सताए रहती है कि जयेश उससे प्यार करता है भी या नहीं? दरअसल, इस असमंजस में बहुत-सी लड़कियां फंसी रहती हैं।
खासकर इसलिए भी क्योंकि यह जानना कठिन होता है कि कोई आपसे वास्तव में प्यार कर रहा है या नहीं? यह ठीक है कि वह सुबह-शाम आई लव यू कह रहा है और आपकी पसंद के तोहफे भी दे रहा है, लेकिन इससे यह साबित नहीं हो जाता कि वह

आपसे प्यार भी कर रहा है।
प्यार महसूस करने की चीज है। अगर किसी के संग से प्यार का अहसास होता है, तो ही प्यार होता है। खैर, विशेषज्ञों ने कुछ ऐसे पैमाने निर्धारित किए हैं जिनके आधार पर यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि आपका ब्वॉयफ्रेंड/ पति/ लिव-इन पार्टनर आपसे प्यार करता है या नहीं? इनमें से कुछेक महत्वपूर्ण पैमाने इस तरह से हैं-
शनिवार की शाम है। आप जरूरी काम से दफ्तर में व्यस्त हैं। इसलिए आप फोन करके अपने साथी से कहती हैं कि आपको लौटने में देर हो जाएगी, वह कोई और कार्यक्रम बना सकता है या कहीं और जा सकता है। लेकिन वह इस बात पर जोर देता है कि वह घर पर ही आपका इंतजार करेगा, भले ही कितनी देर हो जाए और उसके बाद ही आपके साथ कोई कार्यक्रम की योजना बनाएगा। इसका अर्थ है कि वह आपसे प्यार करता है।

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42 week of pregnancy