Tuesday, 17 March 2015

Mango, Orange and Apple fruits are useful for pregnant woman

गर्भवती स्त्री के लिए लाभकारी हैं आम, सेब और संतरे जैसे फल

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को संतुलित भोजन करने की सलाह दी जाती है। गर्भावस्था के दौरान आप के आहार में विटामिन, कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन इत्यादि की मात्रा भरपूर होनी चाहिए। गर्भावस्था के दौरान फल और उनका जूस लेने की खास सलाह दी जाती है, जिससे गर्भवती महिला को पोषण मिल सकें।
गर्भवती महिलाओं के लिए फलों को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है, चाहे बात ताज़े फलों की हो या ड्राई फ्रूट्स की। फलों में भरपूर मात्रा में विटामिन, कैल्शियम और आयरन होता है। मौसमी फल गर्भावस्था में बहुत अधिक फायदा करते हैं। आइए जानें गर्भवती महिलाओं के लिए फल कौन-कौन से खास उपयोगी हैं।
फलों के फायदे
  • http://www.jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8कुछ गर्भवती महिलाएं फलों को खाने के बजाय जूस लेना अधिक पसंद करती हैं, हालांकि जूस भी बहुत फायदेमंद होता हैं, लेकिन आप फलों को बगैर रस निकाले खाएंगी तो आपको ये अधिक लाभ देंगे।
  • गर्भवती महिलाओं के लिए खुराक बढ़ाने का मतलब शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों को ज्यादा तथा इनके साथ टोटल कैलोरी की मात्रा को थोड़ा ही बढ़ाना चाहिए। बहुत से ऐसे फल हैं जो पौषक तत्वों की कमी को दूर करते हैं।
  • सन्तरा, अंगूर, आम, पपीता जैसे मौसम के फलों में खनिज लवण या विटामिन होते हैं जो गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को फिट रखते हैं और शरीर में खून की कमी को दूर करते हैं।
  • गर्भवती महिलाओं को आंखो के लिए 'विटामिन ए', बालों और दांतों और हडि्डयो के लिए कैल्शियम के अलावा 'विटामिन सी' की खास जरूरत होती हैं। ऐसे में उन्हें 'विटामिन ए' से भरपूर फल आम, पपीता, गाजर और विटामिन सी के स्रोत वाले फल आंवला, अमरूद, सन्तरा इत्यादि को लेना चाहिए। 'विटामिन सी' वाले फलों को दिन में दो से तीन बार भी लिया जा सकता है।
  • गर्भवती महिलाएं फलों के साथ-साथ ताकत बढ़ाने और मस्तिष्को को तेज करने वाले ड्राई-फूट्स जैसे- बादाम, काजू, किशमिश, अखरोट इत्याोदि भी ले सकती हैं। ये शिशु के पूर्ण विकास के लिए भी बहुत महत्वू्पर्ण होते हैं
  • कैल्शियम, विटामिन और प्रोटीन से भरपूर फल
  • गर्भावस्था के दौरान लिए जाने वाले फल जिनमें प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन और अन्य पोषक तत्व मौजूद होते हैं।
  • http://www.jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8अनन्नास- कैल्शियम, पोटैशियम, विटामिन ए और सी, और फॉस्फोरस से भरपूर फल है।
  • सेब-क्लोरिन, तांबा, लोहा, मैगनीशियम, मॅन्गनीज तथा फोलिक ऐसिड सेब में पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।
  • पपीता-कैलशियम, क्लोरिन, लोह, पपेन, विटामिन सी और ए से भरपूर है।
  • संतरा-कैल्शियम, क्लोरिन, कॉपर, फ्लोरिन, लोहा, मॅन्गनीज, विटामिन बी1 और सी भरपूर है।
  • नाशपाती-फॉस्फोरस, विटामिन ए, विटामिन बी 1, बी 2, और पोटैशियम पाया जाता है।
  • स्ट्रॉबेरी-इसमें कैलशियम, लोहा, फॉस्फोरस, विटामिन सी और फायबर है।
  • ख़रबूज़ा-विटामिन ए, सी और बी कॉम्प्लेक्स सही मात्रा में पाए जाते हैं।
  • अंगूर-कैल्शियम, क्लोरिन और लोहा हैं।
  • तरबूज़-बहुत भारी मात्रा में खनिज पदार्थ, विटामिन और करीब नब्बे प्रतिशत पानी है।
  • आम-विटामिन ए, ई और सी, लोह से भरपूर है।
  • केला-पोटैशियम, सोडियम, फॉस्फोरस, विटामिन ए, बी1, बी1 और विटामिन सी होते हैं।
  • जामुन-आयरन, विटामिन सी और ए की प्रचुर मात्रा है।

जन्म के बाद छह महीने तक स्तेनपान बच्चे के लिए है सबसे पोषक आहार

जन्म के बाद छह महीने तक स्तेनपान बच्चे के लिए जरूरी


अक्सर देखा गया है कि डिलीवरी के बाद मां का खान-पान का ध्यान नहीं रखा जाता जो न केवल मां बल्कि बच्चे दोनो के लिए ही उचित नहीं है। प्रसव के बाद भी मां को स्वोस्थ  आहार की जरूरत होती है क्योंकि प्रसव के बाद मां का शरीर कमजोर होता है और उसे स्त नपान भी कराना होता है जो बच्चे के लिए सबसे उचित आहार है।
http://www.jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%81-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8प्रसव के समय खून का अधिक स्राव होता है इसलिए प्रसव के बाद मां को अधिक पोषणयुक्त  आहार लेना चाहिए। मां को खाने में ताजे फल और हरी सब्जियों के साथ-साथ साबुत अनाज और दालें खाना चाहिए। इसके साथ ही मां को बच्चे  के पोषण का भी ध्याकन रखना पड़ता है। जैसे ही बच्चाे 6 महीने का होता है स्त‍नपान के अलावा उसे अन्यो पूरक आहार भी देना शुरू कर देना चाहिए।
छह महीने तक
बच्चे के जन्म से लेकर अगले 6 महीने तक मां का दूध ही सबसे अच्छा आहार है क्योंकि मां का दूध बच्चे के पोषण की सभी जरूरतों को पूरा करता। स्तनपान करने वाले बच्चे दूध पीने के हर दो से तीन घंटे के बाद भूख महसूस करते हैं क्योंकि मां का दूध आसानी से पच जाता है जबकि दूसरे स्रोत पर पले बच्चों को जल्दी भूख महसूस नहीं होती। यदि बच्चे के जन्म के पहले हफ्तों में वजन नहीं बढ़ता है तो आपको बच्चे को बार-बार खिलाना चाहिए।   
छह महीने बाद
छह महीने के बाद आप अपने बच्चें को स्तनपान के साथ उसे अर्द्ध ठोस आहार देना शुरू कर सकते हैं। इस दौरान बच्चेब को दाल का पानी पिला सकते हैं। दाल के पानी में विटामिन और कैल्शियम होता है जो बच्चेच के विकास के लिए जरूरी है।
कब दें ठोस आहार
ठोस आहार की शुरुआत का समय हर बच्चे में भिन्न हो सकता है। यदि बच्चे को दूध पिलाने के बीच में भूख लगने लगे और निगलने लगे, साथ ही आपको लगे कि वह ठीक से पचाने में सक्षम है तो आप यह जान जाऐंगे कि अपका बच्चा अर्द्ध ठोस के लिए तैयार है। नए खाद्य पदार्थों की शुरुआत के साथ स्तनपान की आदत को बदलना नहीं चाहिए। अर्द्ध ठोस आहार मैश्ड या शोरबे के रूप में होना चाहिए। शिशुओं को एक घटक वाली दाल भी दी जा सकती है। अपने बच्चे को खिलाना एक झंझट वाला काम हो सकता है जिसमें अधिकतर खाना बच्चे के खाने की बजाय उस पर गिर सकता है।
http://www.jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%81-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8बच्चे के विकास के साथ खिलायें
बच्चे को खिलाते समय एक बिब का प्रयोग करें और खिलाने के लिए एक छोटे से चम्मच का ध्यान रखें। बच्चेम को जल्दीग में न खिलायें, बल्कि उसे आराम से धीरे-धीरे खिलायें। शुरू में वह केवल कुछ चम्मच खाना ही खाएगा या उसे खाने के लिए भी मना कर सकता है। बच्चे पर खाने के लिए दबाव न डालें इसके बजाय कुछ दिनों के बाद कोशिश करें। छह महीने की उम्र तक आपके बच्चे को दूध पीने के साथ तीन बार भोजन देना शुरू करना चाहिए। आप अपने बच्चे को फल और सब्जियां देना शुरू कर सकते हैं।
छह से नौ महीने के बच्चे
बच्चे के सात से आठ माह का होने पर आप जो भोजन उसे दे रहे हैं उसकी बनावट बदल सकते हैं। इस दौरान बच्चेा को दलिया भी दिया जा सकता है। नौ महीने तक बच्चा् हल्के  खाने को आसानी से पचा सकता है। लकिन ध्याआन रहे इस दौरान ज्याैदा गरिष्ठन और मसालेदार आहार बिलकुल न दें।
नौ महीने से एक वर्ष 
अपने बच्चे को दिन में तीन बार भोजन खिलाना जारी रखें। जब आपका बच्चा एक वर्ष का हो जाए तो आप अपने बच्चे को गाय का दूध भी पिला सकते हैं। अपने बच्चे को सभी स्वस्थ भोजन के विकल्प उपलब्ध कराएं और उसे अपने आप खाने के लिए प्रोत्साहित करें और इस समय आप उसकी निगरानी कर सकते हैं। ठोस आहार खाने से आपके बच्चे को प्यास अधिक लग सकती है। उसके एक वर्ष का होने के बाद एक सिपर लेने का विचार कर सकते हैं।

Care From unregulation maturation

अनियमित पीरियड आना कोई असामान्य घटना नहीं है। असामान्य पीरियड के कई कारण होते हैं जैसे तनाव, चिकित्सीय स्थिति, अतीत में सेहत का खराब रहना आदि। इसके अलावा आपकी जीवनशैली भी पीरियड पर खासा असर कर सकती है। पीरियड्स के दौरान, ज्यादा तला-भुना, चटपटा मसालेदार और खट्टा नहीं खाना चाहिए, इस समय आपको क्या खाना चाहिए, यह बहुत कम लोग ही जानते हैं। हम यहां आप को माह के उन दिनों के बारे में बताने जा रहे है जिससे आप साबधान रहें और अपने लाईफ को हैप्पी बनाए रखें।
http://www.jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%8B%E0%A4%A4%E0%A5%81
अधिकांशतः जिन वजहों से पीरियड्स अनियमित हो सकती है या पीरियड मिस हो सकते हैं वे हैं, अत्यधिक व्यायाम या डाइटिंग, तनाव, गर्भनिरोध गोलियों का सेवन, ऎंडोमिट्रिओसिस और प्रीमैच्योर ओवरी फेल्योर।
माह के इन दिनों में आप को चाहिए कि आप अपने रूटीन डायट में ढेर सारी ताजी सब्जियां, जैसे- हरी प्याज, पत्तगोभी, मैथी, पालक आदि सामिल करें। सब्जियों में कई प्रकार के विटामिन्स व मनिरल्स पाए जाते हैं, जिनसे हमारी बॉडी में पोषक तत्वों की कमी नहीं होती। पीरियड्स के इस समय में कैलोरीज की मात्रा भी कम होती है, जिससे आपका वजन भी नहीं बढता। इसके अलावा इसके एंटी-ऑक्सीडेंट्स बॉडी से टॉक्सिन्स को बाहर निकाल देते हैं। सब्जियों में पाए जानेवाले पोषक तत्व दर्द सेलडने में आपकी मदद करते हैं। हरी व पत्तेदार सब्जियों के अलावा हरी मटर, टमाटर, पत्तागोभी, एवोकैडो आदि के सेवन से माहवारी के दर्द में बहुत आराम मिलता है।
पीरियड्स के एक हफ्त पहले से ही खट्टी व ठंडी चीजें खाना बंद कर दें, क्योंकि इससे बॉडी में शिथिलता आ जाती है, जिसके कारण दर्द ज्यादा होता है। इन दिनों पाचनशक्ति कमजोर रहती है, उसे ठीक रखने के लिए पपीता खाएं। अनन्नास में ब्रोमलेन नामक एंजाइम होता है, जो दर्द में आराम दिलाता है, इसलिए अनन्नास खाएं ।
पीरियड्स में ज्यादा दर्द ना हो, इसलिए 1 कप पानी में अदरक का थोडा-सा रस मिलाकर 2 मिनट तक उबालें। उसके बाद थोडा-सा शहद मिलाकर पीएं। पीरियड्स के दौरान खाना खाने के बाद दिन में तीन बार इसका सेवन करने से पीरियड्स में कोई समस्या नहीं होती।

Monday, 16 March 2015

Sexual activity during pregnancy


गर्भावस्था के दौरान किसी भी स्त्री को खास देखभाल की जरूरत होती है, ऐसे में वह अपने पति से सेक्स संबंध बनाने से बचती हैं। क्या गर्भावस्था के दौरान सेक्स करना चाहिए या नहीं। क्या सेक्स संबंधों से होने वाले बच्चे को कोई हानि होती है। गर्भावस्था के दौरान सेक्स पोजीशन क्या होनी चाहिए। गर्भावस्था में सेक्स करते हुए शारीरिक स्फूर्ति आती है या नहीं। गर्भावस्था में सेक्स करते हुए क्या कुछ विशेष सावधानियां http://jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BEबरतनी पड़ती हैं। इन तमाम सवालों को लेकर वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और चिकित्सकों में आज भी मतभेद हैं। लेकिन गर्भावस्था के दौरान लंबे समय तक सेक्स संबंधों से दूरी बनाना पति-पत्नी के लिए मुश्किल भी होता है। इस पोस्ट में हम आप को बताने जा रहे है कि क्या गर्भावस्था में भी सेक्स करना चाहिए।
1.   गर्भावस्था के दौरान चिकित्सक अक्सर स्त्री को सेक्स संबंध से दूर रहने की सलाह देते हैं और गाइनकॉलजिस्ट इंटरकोर्स के लिए खासतौर पर मना कर देते हैं।
2.   लेकिन कुछ अध्ययनों से पाता चला है कि गर्भावस्था में भी सेक्स लाभदायक हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान इंटरकोर्स करने से इंटिमेसी की फिलिंग बढ़ जाता है।
3.   गर्भावस्था के दौरान स्त्री में शारीरिक और भावनात्मक दोनों तरह के बदलाव होते हैं। इस दौरान स्त्री जहां खुद को विशाल और बेचैनी से भरा महसूस करने लगती हैं वहीं पुरूषों को प्रेग्नेंट स्त्री बहुत कामुक और वांछनीय लगने लगती है।
4.   शोध में यह भी साबित हुआ है कि सेक्स और सेक्सुअलिटी दो बिल्कुल अलग-अलग चीजें हैं और स्त्रियां बिना सेक्सुसअल इंटरकोर्स के भी सेक्सुअलिटी को एक्सप्रेस कर सकती हैं। ऎसे में पति-पत्नी ओरल सेक्स करके भी एक दूसरे को प्यार-दुलार आदि से खुशियां दे सकते हैं, जो एक-दूजे को इस वक्त करीब रखने के लिए अहम साबित हो सकते है।  यानी सेक्स किए बिना भी सेक्स की अनुभूति दोनों एक-दूसरे को दे सकते हैं।
http://jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE5.   आमतौर पर पत्नी के गर्भवती होने का पता चलते ही शुरू के दो महीने तक सेक्स करने से बचना चाहिए और गर्भावस्था के अन्तिम एक महीने में भी सेक्स से दूर रहने का प्रयास करें।
6.   गर्भावस्था के दौरान विशेष ध्यान रखना चाहिए कि पत्नी पर सेक्स के लिए दबाव नहीं डालें। गर्भ के समय पत्नी के साथ ऐसा कोई व्यवहार नहीं करें जिससे उसके मन-मस्तिष्क पर विपरीत प्रभाव पड़ें।
7.   सेक्स करने के लिए पति-पत्नीं को चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। ऐसे में वह कुछ अन्य सही सेक्स पोजीशन को अपना कर आप आराम से सेक्स कर सकते हैं, इससे महिला को भी परेशानी नहीं होगी।
8.   गर्भावस्था के दौरान जरूरी है कि महिला भी प्रसन्न हो मन से सेक्स करें अन्यनथा उसे मानसिक और शारीरिक दोनों ही तरह की हानि पहुंच सकती हैं।
9.   यह तो साबित हो चुका है कि गर्भावस्था के दौरान सेक्स करने से पुरूष भी अपने होने वाले बच्चे के न सिर्फ अधिक करीब हो जाता है बल्कि वह पत्नी  के मानसिक रूप से और अधिक करीब आ जाता है।
10.  गर्भावस्था में सेक्स करने में कोई परेशानी नहीं है लेकिन एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि गर्भावस्था में चिकित्सक की सलाह और सावधानी रखें। क्योंकि गर्भावस्था में असावधानी से किया गया सेक्स आपके आने वाले बच्चे के लिए हानिकारक हो सकता है।

8 टिप्स जो हमेशा आप के रोमांस को बनाएं रखें


सेक्सुअल रिलेशनशिप मन और शरीर से जुडा हुआ एक खूबसूरत एहसास है और इसमें मन-शरीर दोनों का कंफर्ट लेवल काफी मायने रखता है। यदि रोमांस करते समय आप तनावग्रस्त या उदासी महसूस करती हैं, चाहे वो आपके फिगर को लकर ही क्यों न हो, ते इससे सेक्सुअल रिलेशन व उससे जुडी आनंद की अनुभूति भी प्रभावित होती है। आज के आधुनिकता इस दौर में हर कोई एक दूसरे से आगे निकालने की होड में है और अपने आंतरिक रिश्तों की अहमियत कोभूलते जा रहे हैं इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड रहा है हमारे सेक्स जीवन पर। अब तो सेक्स क्रिया को पति पत्नी बोरियत समझने लगे हैं इन नुसखों को अपनाएं जो आपकी सेक्स लाइफ को पूरे रोमांस से भर देंगे।
http://jkhealthworld.com/hindi/सेक्स-थैरेपीबेहतर सेक्सुअल लाइफ के लिए जरूरी है कि तन के साथ-साथ आप मन से भी स्वस्थ और खुश रहें, इससे न केवल सेक्स के प्रति आपकी चाह बढेगी, बल्कि आपका सेक्सुअल रिलेशन भी आनंददायक होगा। इस बात को समझें कि सेक्स एकतरफा नहीं, बल्कि प्यार पाने और देने यानी दोनों ओर के आपसी लगाव से जुडा हुआ है।
पोजीशन वगैरह चेंज करके भी सेक्स से अच्छा आनंद मिल सकता है। इस बारे में भी दोनों खुलकर बात करें। सेक्स दोनों को शारीरिक ही नही मानसिक रूप से भी करीब लाता है। इस जुडाव से दांपत्य जीवन मजबूत होता है। रतिक्रिया सेक्स को कभी भी काम की तरह या खाना खाने की भांति न निपटाएं। भूख लगी है तो खाना खाना ही है। काम की तरह निपटाने से जल्द ही इससे ऊब जाएंगे।
बच्चों के जन्म के बाद पत्नी को सेक्स में पहले जैसी रूचि नहीं रह जाती। जबकि अध्ययन तो बताते हैं कि बच्चों के जन्म के बाद क्लाइमेक्स चरमोत्कर्ष की तीव्रता बढ जाती है। निम्न बातों पर गौर करें तो पाएंगे कि अध्ययन ही सही हैं। हम आपको बता रहे छोटेछोटे मंत्र जिनको आजमाकर आपका सेक्स जीवन लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है और शादी के कई वषों बाद भी इसका आनंद उठाते रहेंगे।
नहाते समय करें रोमांस सप्ताह में कितनी बार सेक्स किया आदि बातों पर ध्यान न देते हुए यह ध्यान रखें जब भी करें इसे पूरी तरह से एंज्वॉय करें तो आप पाएंगे कि इसमें संख्या का विशेष महत्व नहीं है। सप्ताह में 4 बार से ज्यादा मजा आपको 2 बार में भी आ सकता है। यदि पति-पत्नी दोनों कामकाजी हैं। समयाभाव और थकान के कारण सेक्स लाइफ खत्म जैसी हो जाती है। ऎसे में बेहतर होता है कि सुबह उठकर फ्रेश मूड में सेक्स का आनंद उठाएं। या मौका मिलने पर साथ नहाने भी जा सकते हैं।

बेहतर सेक्स के लिए तनावमुक्त होना बहुत जरूरी है। इससे आप बहुत आरामदायक फील करेंगे। कम से कम इस समय अपनी सारी चिंताओं, समस्याओं को एक तरफ रख दें। सभी कुछ भूलकर बस एक-दूसरे में खो जाएं। तनाव के समाधान के लिए आपके पास इसके अतिरिक्त भी ढेर सा समय है। सावधानी रखने वाली सबसे जरूरी बात कि किसी भी हालत में नशे का सहारा न लें। सिगरेट या शराब में अपने को डुबोते हैं तो मान कर चलें आप अपना और नुकसान ही कर रहे हैं। नशे की लत से आपको इन समस्याओं से छुटकारा तो नहीं मिलेगा उलट ये बढ जाएंगी।
बाजार में आ रही सेक्स दवाओं आदि का अंधभक्त होकर उपयोग न करें। विज्ञापन आदि से भ्रमित होकर ऎसा लग सकता है कि इनके बिना कुछ कमी सी है, लेकिन प्राकृतिक रूप से भी आप इसका आनंद उठा सकते हैं। मैगजीन्स आदि में प्रकाशित सेक्स से संबंधित आर्टिकल्स या इमेजेस, सीडी आदि का सहारा ले सकते हैं।
सेक्स में आप क्या चाहती हैं, आपको क्या अच्छा लगता है, इस बारे में जीवनसाथी से खुलकर बात करें। एक-दूसरे के साथ अधिक से अधिक समय बिताएं। टहलने के लिए हो सके तो प्रतिदिन आसपास ही कहीं जाएं या टेरेस पर चहलकदमी करें। साल या डेढ साल में शहर से बाहर घूमने जरूर जाएं। यह ब्रेक आपको तरोताजा रखता है। यह आम समस्या है कि आदमी कहता रहता है समय नहीं है, लेकिन इन चीजों के लिए यदि समय नहीं निकालेंगे तो जीवन का नीरस लगना स्वाभाविक है।
शरीर का बेडौल होना या शेप में न होना कई बार महिलाओं में हीनता की भावना भर देता है। याद रखें शादी और बच्चों के बाद अब आप इस स्तर पर आ गए हैं जहां शायद इन चीजों का इतना महत्व नहीं रह जाता। ईश्वर द्वारा बनाए गए इस अनमोल शरीर में रंग, रूप, आकार भिन्न-भिन्न हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि आप संतुलित खानपान और व्यायाम का बिल्कुल भी ध्यान न रखें।