Monday, 9 March 2015

हरी पत्तेदार सब्जियों से गर्भावस्‍था में आवश्यक आयरन की पूर्ति करें।

हरी पत्तेदारसब्जियों से गर्भावस्‍था में आवश्यक आयरन की पूर्ति करें।

गर्भावस्था के दौरान मां के लिए आयरन बहुत महत्वपूर्ण तत्व है क्योंकि इस दौरान गर्भवति स्त्री को कई तरह की स्वास्थ समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिसकी वजह से खून की कमी सबसे बड़ी समस्या बन जाती है।

गर्भावस्था में संतुलित भोजन
आयरन से शरीर में हिमोग्लोबिन बनता है इसलिए गर्भवती स्त्रियों को आयरन युक्त चीजों का सेवन करना चाहिए। कई बार गर्भवती स्त्रियों को डॉक्टर आयरन की पूर्ति के लिए आयरन के टैबलट व कैप्सूल भी खाने को देते हैं। आज हम आप को बताने जा रहे हैं गर्भावस्था में आयरन की पूर्ति का स्रोत और क्यों जरूरत होती है आयरन की गर्भवती स्त्रियों में?
  1. स्त्रियों  में आयरन की जरूरत हीमोग्लोबिन बनाने के लिए होती है। यह प्रोटीन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाता है जो शरीर के विभिन्न अंगों तथा ऊतकों में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है।
  2. जब कोई स्त्री गर्भवती होती है तो उस गर्भवती स्त्री को सामान्य से 50 प्रतिशत अधिक खून की मात्रा चाहिए होती है जिसकी वजह से गर्भवती स्त्रियों में आयरन की जरुरत भी बढ़ जाती है।
  3. गर्भावस्था में संतुलित भोजनअगर गर्भवती स्त्री के खाने में आयरन की उचित मात्रा न हो अर्थात आयरन की उतनी मात्रा नहीं है जितनी कि उसके शरीर को जरूरत है तो  गर्भवति महिला को आयरन की कमी या एनीमिया होने का खतरा रहता है। गर्भावस्था में यह रोग फोलिक एसिड की कमी के कारण भी हो सकता है।
  4. आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया से समय से पहले डिलवरी और कम वजन या अल्पविकसित शिशु पैदा होने की संभावना रहती है।
  5. गर्भवती स्त्री में खून की कमी होने से शिशुओं के दिमाग में लाइलाज किस्म की क्षति होने का खतरा अधिक बढ़ जाता है।   

गर्भावस्था में कितनी मात्रा मेंलें आयरन 

गर्भावस्था के दौरान स्त्री को प्रतिदिन 30 मिलीग्राम आयरन की जरुरत होती है। गर्भावस्था की पहली एवं तीसरी तिमाही में आयरन की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है। एनीमिया से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन 120 मिलीग्राम का आयरन सप्लीमेंट अवश्य लेना चाहिए।

क्या है लक्षण आयरन की कमी का? 

गर्भवती स्त्री में आयरन की कमी होना पर कमजोरी होना, बहुत ज्यादा थकान होना, सांस लेने में समस्या होना, नाखूनों, आखों या होठों का पीला होना आदि लक्षण दिखाई देते हैं। 
  • हरी पत्तेदार सब्जियां आयरन का एक अच्छा स्रोत हैं। गर्भवती स्त्री को प्रतिदिन अपने खाने में पालक, मेथी, बथुए का साग लेना चाहिए।
  • आयरन से भरपूर अन्य सब्जियां हैं, ब्रोकोली, टमाटर, मशरूम, चुकंदर, कद्दू, शतावर तथा शकरकंदी।
  • गर्भवती महिलाएं चुकंदर का जूस भी ले सकती हैं। इससे शरीर में बहुत जल्दी खून बनता है।
  • चर्बीरहित मॉस, चिकन तथा मछली शामिल करने का प्रयास करें।
  • भोजन लोहे के बर्तनों में पकायें।
  • सब्जियों में मेथी या धनिये के पत्ते डालें जिससे स्वाद तो बढ़ता ही है, साथ में उनके पोषक तत्वों भी मिलता है।
  • काजू, नारियल, पिस्ता, किशमिश व अखरोट जैसे मेवे खाएं।
  • सोयाबीन, लोबिया, राजमा, काबुली चना और दालों जैसी फलियां।
  • फल जैसे कि तरबूज, अंगूर, सेब, केला, संतरा व स्ट्राबेरी
  • आटा या पास्ता, अनेक अनाजों से बनी ब्रेड, दलिया ।

Friday, 6 March 2015

Is sex painful the first time?

पहली बार सेक्स करने से संबंधी कई तरह के मिथ जुड़े हुए हैं जिसकी वजह से अक्सर लड़रियों रे मन में यह सवाल रहता है कि क्या संभोग के दौरान दर्द होना सामान्य है। लोगों का ऐसा मनोविज्ञान है कि पहले संभोग के समय में लड़कियों को काफी दर्द का सामना करना पड़ता है। इस दौरान ब्लीडि़ग को लेकर भी अनेक तरह की भ्रांतियां हमारे समाज में मौजूद हैं। क्या सचमुच पहला संभोग कष्टदायक होता है? संभोग करने की स्थिति से भी दर्द का कुछ नाता है? ऐसे कुछ भ्रम लोगों के मन में अकसर रहते हैं। कैसे आप इस दर्द से Is sex painful the first time?निजात पाकर सेक्स संबंधों का आनंद ले सकते हैं और अपने रिश्तों को सामान्य बना सकते हैं। आइए इन पोस्ट के द्वारा हम आप को सेक्स से संबंधी मिथ औप सचाई के बारे में जाने-
संभोग के दौरान होने वाले दर्द को मेडीकल की भाषा में दाईस्पेरेनिया कहते हैं। यह ऐसा दर्द है जो एक बार होने पर बार-बार हो सकता है और इस दर्द का असर महिला-पुरूषों के रिश्ते पर बहुत बुरा पड़ता है।
क्यों होता है दर्द-
    वास्तव में पहली बार संभोग के समय स्त्री को होने वाले दर्द का मुख्य कारण योनि का बहुत ज्यादा टाइट होना होता है। ऐसा तब होता है जब योनि की मांसपेशियां खींच जाती हैं और उनमें सूजन आ जाती है। ऐसी स्थिति में संभोग के समय स्त्री को बहुत अधिक दर्द होता है। ऐसा उन स्त्रियों के साथ होने की संभावना रहती है जो सेक्स संबंधों को बहुत बुरा मानती हैं और संभोग के समय पुरूष के साथ सहयोग नहीं करती। इसका मनोवैज्ञानिक असर यह होता है कि संभोग के समय योनि की मांसपेशिया सिकुड़ जाती हैं और परिणाम स्वरूप स्त्री को तेज दर्द का सामना करना पड़ता है।
   Is sex painful the first time? इसके अतिरिक्त योनि में किसी भी तरह का इंफेक्शन भी संभोग के समय दर्द का एक बहुत बड़ा कारण हो सकता है। अकसर योनि के आकार में परिवर्तन हो जाता है जिसे एंड्रियोमेट्रियोसिस कहते हैं। यदि आपको भी संभोग के दौरान दर्द होता है तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और उचित जानकारी एवं उपचार करवाएं।
    संभोग के दौरान होने वाले दर्द का एक मनोवैज्ञानिक कारण भी है। लड़कियों की परवरिश बचपन से ही इस तरह से की जाती है कि सेक्स को लेकर उनके मन में डर बैठ जाता है। वह सेक्स के नाम से ही घबराने लगती हैं और उन्हें अपनी किशोरावस्था और युवावस्था के दौरान यह भी सुनने को मिलता है कि पहली बार किया गया संभोग बहुत कष्टदायक होता है और इस दौरान खूब ब्लीडिंग भी होती है। लंबे समय तक यह भी माना जाता रहा है कि यदि पहली बार संभोग के दौरान ब्लीडिंग ना हो तो लड़की पहले सेक्स कर चुकी है। ये तमाम बातें लड़की के मन में मनोवैज्ञानिक रूप से संभोग के प्रति डर पैदा कर देती है और इस तरह की लड़कियों को पहली बार संभोग के दौरान अकसर दर्द की शिकायत होती है।
    यदि आप चाहते हैं कि आपको संभोग के दौरान दर्द ना हो तो आपको कुछ सेक्स पोजीशंस का इस्तेमाल पहली बार संभोग के दौरान करना चाहिए और आपको अपने मन से संभोग में होने वाले दर्द व अन्य मिथों को दूर कर देना चाहिए।


गर्भावस्था की योजना }o{ मनचाही संतान }o{ भ्रूण का विकास }o{ गर्भावस्था के लक्षण }o{ गर्भधारण के बाद सावधानियां }o{ गर्भावस्था में कामवासना }o{ गर्भावस्था के दौरान होने वाले अन्य बदलाव }o{ गर्भावस्था में स्त्री का वजन }o{ गर्भावस्था की प्रारिम्भक समस्या }o{ गर्भावस्था की तकलीफें और समाधान }o{ कुछ महत्वपूर्ण जांचे }o{ गर्भावस्था में भोजन }o{ गर्भावस्था में संतुलित भोजन }o{ गर्भावस्था में व्यायाम }o{ बच्चे का बढ़ना }o{ गर्भावस्था के अन्तिम भाग की समस्याएं }o{ प्रसव के लिए स्त्री को प्रेरित करना }o{ प्रसव प्रक्रिया में सावधानियां }o{ अचानक प्रसव होने की दशा में क्या करें }o{ समय से पहले बच्चे का जन्म }o{ प्रसव }o{ जन्म }o{ नवजात शिशु }o{ प्रसव के बाद स्त्रियों के शरीर में हमेशा के लिए बदलाव }o{ बच्चे के जन्म के बाद स्त्री के शरीर की समस्याएं }o{ स्त्रियों के शारीरिक अंगों की मालिश }o{ प्रसव के बाद व्यायाम }o{ नवजात शिशु का भोजन }o{ स्तनपान }o{ बच्चे को बोतल से दूध पिलाना }o{ शिशु के जीवन की क्रियाएं }o{ स्त्री और पुरुषों के लिए गर्भ से संबंधित औषधि }o{ परिवार नियोजन



How to Have Sex During Pregnancy

गर्भावस्था के दौरान स्त्री काफी सतर्क हो जाती है। इस समय में वह हर वक्त न सिर्फ अपने होने वाले बच्चे बल्कि अपने स्वास्थ्‍य की भी अच्छे से देखभाल करती है। गर्भावस्था में सतर्कता के चलते वे अपने पति से शारीरिक तौर पर हर संभव दूरी बनाने की कोशिश करती हैं। लेकिन डॉक्टर्स का कहना है कि स्वस्थ How to Have Sex During Pregnancyगर्भावस्था में संभोग किया जा सकता है। लेकिन कुछ गर्भवती स्त्री की स्थिति नाजुक होने के कारण या फिर कॉम्पलीकेशन होने की वजह से डॉक्टर उन्हें संभोग न करने की सलाह देते हैं। क्या हर व्यक्ति के लिए नौ महीने तक संयम रखना संभव है। ऐसे में उसका पत्नी से अलगाव होने की संभावना बढ़ जाती है। इन स्थितियों को रोकने के लिए हम इस पोस्ट में गर्भावस्था के दौराण सेक्स करने के बारे में बताने जा रहे हैं-
    गर्भावस्था के दौरान संभोग करते हुए कुछ positions का ध्‍यान रखना जरूरी है जिससे की गर्भावस्था के दौरान भी सुरक्षित सेक्स किया जा सकता है जिससे होने वाले बच्‍चे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ सकें।
गर्भावस्था में सेक्स के लिए पोजिसन-
1. पुरुष और महिला एक दूसरे के सामने लेट जाएं। महिला अपना बायां पैर पुरूष के शरीर पर रख दे। इस अवस्‍था में संभोग करने से गर्भ को झटके नहीं लगते।
2. महिला पीठ के बल टखने मोड़कर अपनी टांगें पुरूष के कंधे पर रख कर सेक्‍स करें। इससे पेट पर कोई दबाव नहीं पड़ेगा।
How to Have Sex During Pregnancy3. पुरुष कुर्सी पर बैठे। और महिला पुरूष के उपर बैठ संभोग करें तो भी सेफ सेक्‍स किया जा सकता है।
सावधानी- गर्भावस्था में सेक्स करते सयम हमेशा एक बात का ध्यान रखें की गर्भावस्‍था के दौरान संभोग तो करें लेकिन किसी प्रकार के नए प्रयोग को करने से बचें।
    डॉक्टर्स स्वस्थ गर्भावस्था में सेक्स करने के लिए मना नहीं करते लेकिन सुरक्षित संभोग करने की सलाह देते हैं।
    कुछ शोधों से यह पता चला है कि स्वस्थ गर्भावस्था और बच्चे की अच्छी ग्रोथ होने पर गर्भावस्था के अंतिम सप्ता होने तक में संभोग करना सुरक्षित होता है। लेकिन वही चिकित्सिकों के मुताबिक, पहले तीन महीने और अंतिम तीन महीने संभोग न करें तो अच्छा है, हालांकि बीच के तीन महीने में संभोग से कोई फर्क नहीं पड़ता।
   How to Have Sex During Pregnancyसंभोग गर्भावस्था  में कभी भी हो लेकिन स्त्री की इच्छा के विरूद्व न हो साथ ही सावधानी का खास ख्याल रखा जाना चाहिए।
    गर्भावस्था में संभोग के दौरान पति को खास ख्याल रखना चाहिए और ध्यान रहे स्त्री पर बहुत ज्यादा दबाव न पड़े।
    कैसे करें गर्भावस्था में संभोग इस बारे में आप अपने डॉक्ट की सलाह एवं जानकारी ले सकते हैं। आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान सेक्स करते समय कुछ अवस्थाओं का खास ध्यान रखना होता है। कुछ अवस्थाएं ऐसी हैं, जिन्हें बनाकर सेक्स करने से बच्चे पर प्रभाव नहीं पड़ता।
    कुछ व्यायामों के माध्यम से भी संभोग किया जा सकता है लेकिन डॉक्टर की सलाह पर।
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Why Girls Don't Want to Get Married

किस कारण से लड़कियां डरती हैं शादी करने से?

हमेशा से ही जब लड़कियों 20 साल की होती है तो उसकी शादी सबसे बड़ी चिंता माना जाता रहा है। आज कल विभिन्न संस्थाऔं द्वारा यह बताने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है कि  लड़कियों के जीवन का उद्देश्य सिर्फ विवाह करना ही नहीं रह गया है। आज बहुत सी भारतीय लड़कियां देर से शादी करना चाहती हैं और 
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अपने जीवन में कुछ कर दिखाने की चाहत रखती है। हम आपको आज इस पोस्ट में ऐसे ही कुछ कारण का बर्णन करने वाले हैं जो इस बात की पुष्टि होती है कि लड़कियां ज्यादा उम्र में क्यों शादी करना चाहती हैं?
1. अक्सर लड़कियां आजादी छिन जाने के डर से सिंगल रहना चाहती है क्योंकि उसका मानना है कि जब तक वे सिंगल हैं तब तक वे स्वंतत्र हैं और जो उनके मन में आये वो कर सकती हैं। लेकिन जैसी ही शादी होगी वे कुछ भी स्वतंत्र रूप से नहीं कर पाएंगी। उनमें यह डर पैदा हो जाता है कि शादी के बाद उनका पति और इन-लॉज़ जो कहेंगे वो ही करना होगा और उनके सपने अधूरे रह जाएगें, यह एक बड़ा कारण जिससे लड़कियों के मन में शादी के प्रति विपरीत सोच पैदा हो होती देखी जाती है।
2. बड़े बदलाव की आशंका हम सब जानते हैं कि बहुत से लोगों के लिए बदलाव इतना आसान नहीं होता है, तो महिलाएं इससे अछूती कैसे रह सकती हैं? इसलिए घर, परिवार , जीवनशैली आदि में बदलाव जैसे विचार ही उनके सिर में दर्द पैदा कर देते हैं। लेकिन शादी से डरने का यह सही कारण नहीं है।
3. माँ का लाड प्यार लड़कियों को माँ से मिलने वाला लाड-प्यार और देखभाल भी इसका कारण है। अपनी माँ से मिलने वाले प्यार के कारण वो सोचती हैं कि शादी के बाद उनसे इतना प्यार कौन करेगा और वो इसको मिस करेंगी। अपनी मम्मी की कहीं बातें कि 'तुम्हारे ससुराल वाले तुम्हारे नखरे मेरी तरह बर्दाश्त नहीं करेंगे' यह भी उनमें एक डर पैदा करता है।4. विवाहिता का ठप्पा और कानून कायदे शादी के बाद हर भारतीय महिला से आशाएं होती हैं कि उसके बच्चे हों, वह उनकी देखभाल करें और उनकी शिक्षा के लिए पैसे बचाएं। चूँकि आजकल की महिलाएं 'माई लाइफ, माई मंत्रा, (यानि मेरी जिंदगी मेरा जीने का तरीका) को फॉलो करती हैं इसलिए भी शादी का विचार उनके लिए डराने वाला होता है।
5. कमिटमेंट पूरा करने का डर सिर्फ पुरुष ही कमिटमेंट से नहीं डरते बल्कि महिलाएं भी रिश्ते निभाने से डरती हैं। कहीं यह गलत निर्णय ना हो या कहीं चीजें गलत ना हो, और भी कहीं ऐसा तो नहीं होगा? ऐसा सोचते सोचते लड़कियों को शादी से डर लगने लगता है।
5. कमिटमेंट पूरा करने का डर सिर्फ पुरुष ही कमिटमेंट से नहीं डरते बल्कि महिलाएं भी रिश्ते निभाने से डरती हैं। कहीं यह गलत निर्णय ना हो या कहीं चीजें गलत ना हो, और भी कहीं ऐसा तो नहीं होगा? ऐसा सोचते सोचते लड़कियों को शादी से डर लगने लगता है।
7. जिम्मेदारी बढ़ना शादी के बाद महिला की जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है। इनमें से बहुत सी महिलाओं को कुकिंग, साफ़ सफाई और घर के अन्य जिम्मेदारियों का निर्वहन करना पड़ता है। लड़कियां जानती हैं जब कोई माँ अपने बेटे के लिए बहु तलाशती है तो उसकी कोशिश रहती है कि लड़की घर के काम में दक्ष हो ताकि
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उनका हाथ बटा सकें। कोई भी महिला इसमें सहज महसूस नहीं करती है। क्या आपको लगता है कि ऐसा सोचा जाना चाहिए?
8. पूरे परिवार के साथ रहना भारत में शादियों में सिर्फ दो लोग नहीं जुड़ते हैं बल्कि उनके परिवार भी जुड़ते हैं। मुख्यतः रिश्तेदारों की एक बड़ी लिस्ट होती है जिसको नवविवाहिता को समझना पड़ता है। चाहे वह उन्हें पसंद नहीं करे लेकिन फिर भी उनके साथ अच्छा व्यवहार करना पड़ता है। इससे भी ज्यादा वह अचानक ही किसी की भाभी, चाची और ना जाने क्या-क्या बन जाती है? उसे सिर्फ ये रिश्ते ही नहीं डराते बल्कि शादी के बाद नए लोगों के बीच संतुलन बिठाना भी उन्हें डराता है।
9. पहचान बदलना भारत में शादी के बाद महिला का सरनेम भी बदल जाता है। कई समुदायों में तो उसका पहला नाम भी बदल जाता है। कई लड़कियों के लिए यह एक बड़ा चिंता का विषय है। जिस पहचान के साथ उन्होंने जिंदगी की शुरुआत की और जिसके साथ इतने साल बिताये वह पहचान अब बदल जायेगी, यह उन्हें चिंतित करता है।

Thursday, 5 March 2015

How to safe hair from holi color


 कैसे बचाएं बालों को होली के रंगों से 

होली की मस्‍ती में हर कोई मग्न होना चाहता है लेकिन इसमें सबसे बड़ी
समस्‍या आती है होली के रंगों से बालों का नुक्सान होने का, क्योकि रंगों में कैमिकल्स होने के कारन यह बालों के लिए बहुत हानिकारक कैसे बचाएं बालों को होली के रंगों सेहोता है। होली के रंगों से जितना ज्‍यादा हमारी त्‍वचा को नुकसान पहुंचता है उससे कहीं ज्‍यादा हमारे बालों को नुकसान होता है। होली के कैमिकल वाले रंगों से बाल रूखे और बेजान हो जाते हैं। आज कल बाजार में मिलने वाले होली के रंगों में घातक कैमिकल्‍स के साथ कांच के पावडर और एसिड मिलाए जाते हैं, जिनसे हमारे शरीर को काफी नुकसान हो सकता है। ऐसे में होली के रंग से बालों का किस तरह से ख्‍याल रखें इसके बारे में आज हम आपको इस पोस्ट में बताने जा रहें हैं-
1. हेयर मसाज होली खेलने से पहले बालों में अच्‍छी तरह से मसाज करें जिससे बालों की जड़ें और मजबूत हो जाएं।2. हेयर मसाज होली खेलने से पहले बालों में अच्‍छी तरह से मसाज करें जिससे बालों की जड़ें और मजबूत हो जाएं।
3. प्राकृतिक तेल का इस्‍तमाल बालों में बाजारू तेल न लगा कर प्राकृतिक तेल जैसे जैतून का तेल या फिर नारियल का तेल लगाएं।
 
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4. दो मुंहे बालों से छुटकारा पाएं होली खेलने के दो दिन पहले अपने बालों से दो मुंहे बाल छंटवा लें।
5. बालो में शैंपू ना करें होली खेलने के दो दिन पहले बालों में शैंपू ना करें, इससे पोर्स बंद रहेंगे जिससे रंग अंदर नहीं जा पाएगा और बाल खराब नहीं होंगे।
 
6. बेबी ऑइल है अच्‍छा बेबी ऑइल सिर के लिये काफी अच्‍छा होता है और इसके कोई साइड इफेक्‍ट भी नहीं होते। जब बात होली के रंगों की आए तो आपको सिर पर बेबी ऑइल ही लगाना चाहिये।
7. बालों को बांध कर रखें पोनी टेल बनाने की जगह पर एक चोटी बना कर होली खेलने जाएं। यदि बाल लंबे हैं तो उन्‍हें बिल्‍कुल भी खुला ना छोडे़।
8. अपने सिर को कवर करें होली खेलते वक्‍त अपने सिर को कवर कर के रखें। या तो स्‍कार्फ का सहारा लें या फिर हैट पहने।
9. सफेद बालों के लिये सुझाव अगर आपके बाल सफेद हो चुके हैं, तो होली के रंग उन पर अच्छे से चढ़ सकते हैं। ऐसे में बालों में चढ़े रंग महीने भर तक नहीं उतरता है। तो होली खेलने से पहले अपने बाल डाई करना न भूलें।