Tuesday, 3 March 2015

Get some important question to answer before get pregnant


 गर्भधारण से पहले जाने कुछ महत्वपूर्ण बातों का जवाब
आज के समय में गर्भावस्था संबंधी अनेक प्रश्नों का जवाब इन्टरनेट के जरिये मिल जाता है फिर भी आप को चाहिए कि अपने डॉक्टर से मिलकर उनसे कुछ सवालों के जवाब पा लें।
डॉक्टर से गर्भधारण से सम्बंधित सवाल-जवाब करने पर अक्सर डॉक्टर आपसे कुछ बातें जरूर जानना चाहेंगे। जैसे कि आपकी शादी को कितने साल हो गए, आपने परिवार नियोजन के लिए किन उपायों को अपनाया है या अपनाया हुआ था, या फिर आप पहली बार गर्भ धारण तो नहीं कर रहीं हैं इस तरह के कई सवाल आप से पुछेंगे।
डॉक्टर आपसे पूछ सकते हैं कि क्या इसके पहले आपका गर्भपात हुआ है। अगर हुआ है तो किन कारणों से और यह सवाज स्वस्थ गर्भधारण की दृष्टी से पूछे जाना सही भी है। कई बार युवावस्था में शादी के पहले ही किसी प्रेम संबंध के चलते गर्भधारण हो जाता है और ऐसे में गर्भपात करवाना जरुरी हो जाता है। अगर आपके साथ ऐसी कोई घटना घटी हो तो डॉक्टर को इसकी बताना जरुरी होता है।
डॉक्टर आपसे जानना चाहेंगे कि कही आपको किसी बीमारी का इलाज तो नहीं चल रहा है। इसलिए अगर आपको किसी बीमारी का इलाज चल रहा हो तो बीमारी और उसके लिए ली जाने वाली दवाइयों की जानकारी डॉक्टर को अवश्य दें।
जिन लोगों को मस्तिष्क सम्बन्धी बीमारियों का उपचार चल रहा होता है उनके लिए सफलतापूर्वक गर्भ धारण करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में इस बारे में जानने के बाद आपका डॉक्टर आपको सही सलाह दे सकते हैं  कि  आप क्या करें।
अगर आपको मिर्गी या फिट्स आने की बीमारी हो या ब्रेन ट्यूमर जैसी बीमारी हो और उनकी दवाइयां चल रही हों तो गर्भधारण करने में कठिनाई आ सकती है। इसलिए इसकी जानकारी अपने डॉक्टर को अवश्य दें।

गर्भावस्था की योजना }o{ मनचाही संतान }o{ भ्रूण का विकास }o{ गर्भावस्था के लक्षण }o{ गर्भधारण के बाद सावधानियां }o{ गर्भावस्था में कामवासना }o{ गर्भावस्था के दौरान होने वाले अन्य बदलाव }o{ गर्भावस्था में स्त्री का वजन }o{ गर्भावस्था की प्रारिम्भक समस्या }o{ गर्भावस्था की तकलीफें और समाधान }o{ कुछ महत्वपूर्ण जांचे }o{ गर्भावस्था में भोजन }o{ गर्भावस्था में संतुलित भोजन }o{ गर्भावस्था में व्यायाम }o{ बच्चे का बढ़ना }o{ गर्भावस्था के अन्तिम भाग की समस्याएं }o{ प्रसव के लिए स्त्री को प्रेरित करना }o{ प्रसव प्रक्रिया में सावधानियां }o{ अचानक प्रसव होने की दशा में क्या करें }o{ समय से पहले बच्चे का जन्म }o{ प्रसव }o{ जन्म }o{ नवजात शिशु }o{ प्रसव के बाद स्त्रियों के शरीर में हमेशा के लिए बदलाव }o{ बच्चे के जन्म के बाद स्त्री के शरीर की समस्याएं }o{ स्त्रियों के शारीरिक अंगों की मालिश }o{ प्रसव के बाद व्यायाम }o{ नवजात शिशु का भोजन }o{ स्तनपान }o{ बच्चे को बोतल से दूध पिलाना }o{ शिशु के जीवन की क्रियाएं }o{ स्त्री और पुरुषों के लिए गर्भ से संबंधित औषधि }o{ परिवार नियोजन
अन्य गर्भ धारण संबंधी सवाल और जवाब-
  • अगर आप गर्भ निरोधक गोलियों का सेवन करती आई हैं तो आप डॉक्टर से यह पूछ सकती हैं कि  अगर गर्भ धारण करनी हो तो कितने दिनों पहले गर्भ निरोधक गोलियों का सेवन करना बंद करना होगा।
  • आपको यह भी पूछना चाहिए कि  आपका वर्तमान वजन सही है या उसे कम या ज्यादा करने की जरूरत है।
  • आप अपने डॉक्टर से यह भी पूछ सकती हैं कि  क्या कुछ विशेष व्यायाम होते हैं जिनको करने से गर्भधारण करने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
  • आप जिस उम्र में गर्भ धारण करना चाहती हैं उस उम्र में क्या क्या जोखिम होते हैं और क्या क्या सावधानियां बरतनी चाहिए इत्यादि भी अपने डॉक्टर से पूछ सकती हैं।
  • अगर आप पहले से हीं एक बच्चे की माँ हैं तो आपको यह पूछना चाहिए कि  वर्तमान समय दूसरे बच्चे के गर्भधारण के लिए कितना उचित है।आपको गर्भधारण के लिए क्या खाना पीना चाहिए, कितनी नींद लेनी चाहिए एवं किस पोज में सहवास करने से गर्भधारण के चांसेस ज्यादा होते हैं इन सब बातों पर अपने डॉक्टर से जानकारी लेनी चाहिए ताकि आप आसानी से गर्भधारण कर सकें तथा आपका बच्चा स्वस्थ पैदा हो साथ हीं  डिलीवरी के वक्त आपको या आपके बच्चे को कोई तकलीफ न हो।

गर्भावस्था की योजना }o{ मनचाही संतान }o{ भ्रूण का विकास }o{ गर्भावस्था के लक्षण }o{ गर्भधारण के बाद सावधानियां }o{ गर्भावस्था में कामवासना }o{ गर्भावस्था के दौरान होने वाले अन्य बदलाव }o{ गर्भावस्था में स्त्री का वजन }o{ गर्भावस्था की प्रारिम्भक समस्या }o{ गर्भावस्था की तकलीफें और समाधान }o{ कुछ महत्वपूर्ण जांचे }o{ गर्भावस्था में भोजन }o{ गर्भावस्था में संतुलित भोजन }o{ गर्भावस्था में व्यायाम }o{ बच्चे का बढ़ना }o{ गर्भावस्था के अन्तिम भाग की समस्याएं }o{ प्रसव के लिए स्त्री को प्रेरित करना }o{ प्रसव प्रक्रिया में सावधानियां }o{ अचानक प्रसव होने की दशा में क्या करें }o{ समय से पहले बच्चे का जन्म }o{ प्रसव }o{ जन्म }o{ नवजात शिशु }o{ प्रसव के बाद स्त्रियों के शरीर में हमेशा के लिए बदलाव }o{ बच्चे के जन्म के बाद स्त्री के शरीर की समस्याएं }o{ स्त्रियों के शारीरिक अंगों की मालिश }o{ प्रसव के बाद व्यायाम }o{ नवजात शिशु का भोजन }o{ स्तनपान }o{ बच्चे को बोतल से दूध पिलाना }o{ शिशु के जीवन की क्रियाएं }o{ स्त्री और पुरुषों के लिए गर्भ से संबंधित औषधि }o{ परिवार नियोजन

How to conception- Some tips keep on your mind during first time conception

पहली बार गर्भधारण करते समय रखें इन बातों का ख्याल-
पहली बार गर्भधारण के समय मन में कई प्रकार के विचार आते हैं जो आसपास के लोगों के द्वारा दी गई सलाह व अन्य कई सारी बातों के कारण काफी भ्रम पैदा करने वाली हो सकती है। इस लिए यहां हम आप को पहली बार गर्भधारण के लिए कुछ आवश्यक टिप्स देने जा रहें है जो पहली बार गर्भधारण के दौरान काफी लाभकर सिद्ध होगा-
गर्भा धारण कैसे करें

गर्भधारण से पहले शारीरिक कार्यो व खानपान से जुड़ी कुछ बातें को जानना आवश्याक ताकि मां एक तंदुरुस्त बच्चे को जन्म दे सकें अर्थात स्त्री स्वस्थ गर्भधारण कर सकें, अगर आप पहली बार गर्भधारण कर रही हैं तो इसके लिए यह बहुत जरूरी है कि आप स्त्री रोग विशेषज्ञ से नियमित सलाह लें ताकि आप किसी भी असामान्य परिस्थिति से बच सकें और आपको बच्चे को जन्म देते समय किसी प्रकार की परेशानी ना आये।
संतुलित आहार सूची-
गर्भावस्था के समय किस तरह का आहार लें इससे संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। आमतौर पर डाइट प्लान की योजना बॉडी मास इन्डेक्स पर आधारित होती है आहार सूची का पालन करना आपके गर्भधारण को सहज बनाता है।

पहली बार गर्भधारण के लिए ध्यान रखने योग्य बातें- 
  • गर्भधारण के दौरान उचित कैलोरी और पौष्टिक आहार लें। जैसे- अनाज, सब्जि़यां, फल, बिना चर्बी का मीट, कम वसा युक्त दूध।
  • ऐसी स्थिति में आप ज्यादा मात्रा में फालिक एसिड, आयरन, कैल्सियम, विटामिन ए एवं बी-12 का सेवन करें।
  • अपने आहार संबंधी सभी नियमों का पालन करें।
  • साथ ही साथ गर्भधारण के दौरान आपके डाइट में आपके शरीर में पानी की खपत एवं उसके बहुआयामी उपयोगों जैसे टाक्सिंस एवं शरीर के तापमान को सामान्य बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण रखा गया है।
गर्भावस्था की जांच
गर्भावस्था की जांच
शारीरिक कार्य-
  • गर्भवास्था में किसी भी प्रकार की शारीरिक जोखिम भरे कार्य ना करें।
  • सभी प्रकार के नियमों का पालन करना चा‍हिए।
  • किसी भी प्रकार के शारीरिक व्यायाम या भारी बोझ उठाने से बचना चाहिए।
  • खैर भारी कामों को छोड़ कर आप कुछ आम शारीरिक कार्य कर सकती हैं।
  • अपने रोजमर्रा की शारीरिक गतिविधियों के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
धुम्रपान एवं शराब का प्रभाव-
  • पहली बार गर्भधारण करने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ तैयार होने के बाद ही बच्चे के बारे में सोचें और जरूरी चेकअप अवश्य कराएं।
  • गर्भधारण के दौरान धुम्रपान करना या शराब पीना आपके होने वाले बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है इससे आपका बच्चा कमजोर पैदा हो सकता है। धुम्रपान एवं शराब की आदत गर्भपात की संभावना को भी बढ़ा देती है। इसी तरह शराब पीने वाली महिलाओं के लिए भ्रूण संबंधी अनियमित लक्षणों का विकास होता है।
नियमित डॉक्टरी जांच-
अगर बार मां बनने जा रही हैं तो ब्लडटेस्ट अवश्यब करा लें, क्योंकि अगर मां के खून में आरएच फैक्टार निगेटिव है और पिता का आरएच फैक्ट्र पॉजिटिव है तो ऐसे में बच्चेा को गर्भ में ही पीलिया होने की संभावना ज्यादा होती है।
गर्भधारण के नौ महिनों के दौरान महिलाएं बहुत तरह के बदलाव का अनुभव करती हैं। कुछ प्रमुख बदलाव जैसे योनि में खून आना, सुजन, सिरदर्द, गांठ, शरीर के तापमान का बढ़ना, उल्टी एवं अन्य समस्याएं, अगर यह समस्याएं लम्बे समय तक हो तो गाइनीकोलाजिस्ट को चेक करवाएं।

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Monday, 2 March 2015

Pregnancy calender- Know your infantile growth

प्रेग्नेंसी कैलेंडर से जाने बच्चे का विकास का हाल

गर्भधारण के बाद बच्चे का विकास होना शुरू हो जाता है। गर्भावस्था कैलेंडर के द्वारा इसकी जानकारी की जा सकती है। गर्भधारण के प्रोसेस में स्त्री के अंडाणु और पुरूष के शुक्राणुओं के मिलने से बच्चे की उत्पति होती है।
गर्भावस्था के दौरान बच्चे का विकास नौ महीने तक विभिन्न चरणों में होता है। बच्चे का विकास सप्ताह दर सप्ताह होते-होते, महीनों और फिर ट्राईमेस्टर में बदल जाता है। गर्भावस्था कैलेंडर के द्वारा गर्भवती स्त्री में बच्चे का विकास कितना हुआ है ये जान सकते है या होने वाले बच्चे को कितना समय लगेगा। आमतौर पर प्रेग्नेंसी कैलेंडर में नौ महिने तय किए गए हैं, लेकिन आपातकालीन स्थिति में ये कैलेंडर आठ महीने या दस महीने का भी हो सकता है।
प्रेग्नेंसी कैलेंडर द्वारा स्त्री यह जान सकती हैं कि होने वाला बच्चे नॉर्मल है या नहीं। गर्भावस्था कैलेंडर के माध्यम से ही भ्रूण के विकास और आने वाली स्थितियों का अंदाजा रहता है। कई बार इस कैलेंडर की बदौलत गर्भवती अपनी डिलीवरी तिथि के बारे में भी जान सकती है। पहले ट्राईमेस्टर में एक से तीन महीने, दूसरे ट्राईमेस्टर में चार से छह महीने और तीसरे ट्राईमेस्टर में सात से नौ महीने होते हैं।
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भ्रूण का अलग-अलग महीनों में विकास के लिए प्रेग्नेंली कैलेंडर दिए जा रहे हैं-
पहला महीना
http://jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%A3-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B8गर्भधारण के पहले महीने में आमतौर पर सेहत संबंधी समस्याएं अधिक नहीं होती। इस महीने में स्त्री को मासिकधर्म आने बंद हो जाते हैं और स्त्री को बार-बार वाशरूम के चक्कर लगाना पड़ जाता है। त्वचा का रंग भी बदल सकता है, ऐसे में भारी सामान उठाने से परहेज करना चाहिए।
दूसरा महीना
यह थोड़ा जटिल समय होता है, इस महीने में बच्चे के हृदय का विकास होता है और इसलिए इसमें सावधानी आवश्यक है। दूसरे महीने के बाद अल्ट्रा साउंड के सहारे यह बताना आसान हो जाता है कि बच्चे का सिर किस तरफ है और पैर किस तरफ है।
तीसरा महीना
तीसरे महीने में बच्चे की हड्डियों के साथ ही कान और बाहरी अंगों का निर्माण होता है। इस समय बच्चे का सिर शरीर का सबसे बड़ा भाग होता है।
चौथा महीना
चौथे महीने में हार्मोन का निर्माण होने लगता है और बच्चा के शरीर से एमनियोटिक द्रव भी निकलने लगता है। इस समय बच्चे का वजन लगभगग 85 ग्राम तक होता है।
पांचवा महीना
पांचवे महीने में बच्चे  की लंबाई लगभग 25 सेंटीमीटर होती है। ऐसे में होने वाले बच्चे की गति को महसूस किया जा सकता है। हालांकि इस महीने में बच्चें के नए अंग नहीं बनते, लेकिन बच्चे के हाथों और पैरों के पैड और उंगलियों का विकास होता है।
छठा महीना
कुछ बच्चों का जन्मि 6 महीनों पर ही हो जाता है। ऐसे बच्चों को प्रीमैच्योर बेबी कहा जाता है। इस समय बच्चे के शरीर में ब्राउन वसा बननी शुरू हो जाती है, जिससे बच्चे के शरीर का ताप नियंत्रित रहता है।
सातवां महीना
http://jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%A3-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B8बच्चें की किक महसूस करने का समय आ गया है। गर्भवती स्त्री की नींद पर भी असर पड़ सकता है। होने वाला बच्चे आपके पाचन तंत्र को और आपकी सांसों की गति को महसूस कर सकता है। कुछ बच्चे  इस समय भी पैदा हो जाते हैं, लेकिन उन्हें  विशेष देखभाल की आवश्यहकता होती है।
आठवां महीना
इस महिने में बच्चे, अब किसी भी समय इस नई दुनिया में प्रवेश कर सकता है। लेकिन, वो जितना समय आपके गर्भ में बिताएगा बच्चे के स्वास्थ  के लिए यह उतना ही अच्छा होता है। इस महिने में बच्चे का पूरा विकास हो चुका होता है।
नवां यानी अंमित महीना
चि‍कित्सहक ने शायद आपको प्रसव का दिन बता दिया हो। आपका शिशु कभी भी दुनिया में कदम रख सकता है। यह खुशी के साथ ही खतरों का भी समय है, इस समय अपने अनुभवों को महसूस करना बेहद जरूरी है। बच्चेक का वजन अब 7 पाउंड तक हो सकता है।
अधिकतर बच्चे चिकित्स के बताए गए समय से पहले ही पैदा हो जाते हैं। ऐसे में आपको सर्जरी व प्राकृतिक रूप से होने वाले प्रसव की भी जानकारी होनी चाहिए। हो सके तो घर के बाहर कम निकलें और देख-रेख के लिए हर समय आपके पास कोई ना कोई होना चाहिए।
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8 main benefits of exercise in pregnancy

गर्भावस्था में व्यांयाम के 8 मुख्यो लाभ
गर्भावस्थाह के दिनों में शरीर में कई बदलाव होते हैं। लेकिन अगर आप लगातार व्यापयाम करती हैं तो इन प्रभावों को कम किया जा सकता है। गर्भावस्थार के लिए विशेष व्यायाम होते हैं जो आपको हमेशा फिट और हेल्दी  रखते हैं। इन एक्सिरसाइज के निम्न्लिखित लाभ होते हैं:
1. थकान से मुक्ति: गर्भावस्था  के दिनों में थकान काफी ज्याहदा रहती है। शुरूआत के तीन महीने बहुत ज्याादा थकान महसूस होती है। ऐसे में अगर आप नियमित रूप से डॉक्टभरी सलाह को मानकर एक्सतरसाइज करें, तो आपको काफी लाभ होगा। वॉक करने से भी आपको इस दौरान काफी लाभ मिलेगा।
2. गर्भावस्थात के दौरान अच्छी  नींद दिलाएं: गर्भावस्था  के दौरान व्यामयाम करने से गर्भवती स्त्री  को नींद अच्छीह आती है। नींद का न आना और उनींदे रहने की समस्यां दूर हो जाएगी। अच्छीस नींद से आने शरीर की आकी समस्याकएं भी दूर हो जाती हैं। गर्भावस्था  में व्या याम के 8 मुख्या लाभ
3. कब्जम दूर भगाएं: गर्भावस्थार के दौरान कई महिलाओं को कब्जइ की समस्याै हो जाती है। इसके लिए जरूरी है कि आप हर दिन 30 मिनट वॉक करें। वॉक करने से पाचन क्रिया में इज़ाफा होता है और कब्ज् की समस्या  से राहत मिलती है। गर्भवती महिलाओं के लिये सांस से सम्बंधित 4 व्यायाम
4. प्रेग्नेंससी बैक एक्स रसाइज करें: गर्भवती महिलाओं को अक्स र पीठ और कमर में दर्द की शिकायत रहती है। इसके लिए जरूरी होता है कि वो बैक एक्सीरसाइज करें। ऐसी एक्सEरसाइज को डॉक्टलर की सलाह के आधार पर ही करना चाहिए। आप चाहें तो शॉर्ट वॉक भी कर सकती हैं।
5. चिंता न करें, हमेशा खुश रहें: गर्भावस्थार के दौरान आप किसी भी प्रकार की चिंता न करें, खुश रहने की कोशिश करेें। लेकिन ऐसा कई बार नहीं हो पाता है इसलिए एक्स रसाइज करना जरूरी होता है। एक्स रसाइज करने से ब्रेन से एंडोमॉर्फिन नामक हारमोन निकलता है जो आपका मूड स्वींग होने से बचाता है, आपकी चिंता और तनाव को दूर करने में मदद करता है।
6. हेल्दीज बच्चाज: व्या याम करने से आपके शरीर में रक्तह का संचार अच्छा, होता है, ताजी हवा आपके फेफड़ों तक पहुंचती है, इससे आपके शरीर को और होने वाले बच्चेस को काफी लाभ होता है।  शिशु को मालिश की कोई जरुरत नहीं, बोलते हैं डॉक्ट्र्स
7. डायबटीज से बचाव: गर्भावस्थाक के दौरान कई बार डायबटीज हो जाती है, एक्स,रसाइज से इस पर काबू पाया जा सकता है। गर्भावस्थाे के दौरान होने वाली डायबटीज घातक नहीं होती है, लेकिन इसके होने से सर्जरी होने में समस्याप आ सकती है, इस डायबटीज को गेस्से शनल डायबटीज कहा जाता है।
8. प्रसव असहनीय नहीं होता: व्यायाम करने से शरीर फिट रहता है और प्रसव के दौरान भी कम समस्याय होती है। अगर आप नियमित एक्सकरसाइज करती रहें तो कम प्रसव पीड़ा होती है। इस तरह एक्स रसाइज आपको गर्भावस्था के दौरान भी फिट रखती है।
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