Friday, 13 March 2015

39th week of pregnancy

किसी भी स्त्री के लिए गर्भावस्था का 39वां हफ्ता शुरू होना खुशियों से भरा सप्ताह होता है।  इस हफ्ते के दौरान गर्भवती महिला की घबराहट बढ़ जाती है।गर्भावस्था के दौरान स्त्री को सामान्‍य दिनों के अपेक्षा अतिरिक्‍त देखभाल की आदत हो जाती हैं, ऐसे में आपको आगे के लिए कोई परेशानी न हो इसलिए छोटे-मोटे कामों में अपना हाथ बंटाने के साथ ही व्‍यायाम भी करती रहें। गर्भावस्था की शुरूआत के बाद से इस स्थिति में पहुंचने तक आपने अपने स्‍वास्‍थ्‍य में कई उतार-चढ़ाव देखें हैं।
39वां सप्ताह से जुड़ी बातें
  • 39वां सप्ताह आपकी गर्भावस्था का अंतिम सप्‍ताह हो सकता है। किसी भी समय आपको प्रसव पीड़ा हो सकती है। ऐसे में आप को हमेशा अपने आप को तैयार रखना चाहिए। आमतौर पर 38 हफ्तों में भ्रूण पूरी तरह विकसित हो जाता है।
  • इस सप्ताह जन्‍म लेने वाले शिशु की लंबाई 19 से 21 इंच तक का हो सकती है।
  • इस सप्‍ताह जन्‍म लेने वाला बच्चा लगभग सात से आठ पाउंड का होता है।
  • अब जो बच्‍चा पैदा होगा उसकी त्वचा का गुलाबी रंग, सफेद रंग में परिवर्तित होने लगेगा। यह बाद में गहरे रंग में बदल जाता है। 39वां सप्ताह में शिशु का दिमाग तेजी से विकसित होने लगता है।
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39वां सप्ताह में गर्भ में पल रहे बच्‍चे की मांसपेशियां परिवक्व हो जाती हैं और बच्चे के सभी अंग पूरी तरह विकसित हो जाते हैं अर्थात इसी सप्‍ताह आपको प्रसव पीड़ा हो तो समझें कि आपका बच्चा पूर्ण विकसित हो चुका है। इस सप्‍ताह में होने वाले बच्‍चे की लंबाई 19 इंच से 21 इंच तक और वजन छह पाउंड तक होता है। इस सप्ताह में बच्चा भी प्रसवास्था में अपनी भागीदारी देता है, जैसे ही वह सहज और अधिक गर्माहट महसूस करता है तो निरंतर बाहर आने का प्रयास करने लगता हैं।
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गर्भवस्था के तीसरे ट्राइमिस्‍टर का अंतिम समय में आपको 475 से 625 किलो कैलोरी की जरूरत होती है। यदि आपका ज्‍यादा वजन बढ़ रहा है तो डॉक्टर से संपर्क करें। गर्भावस्‍था में महिला को ज्‍यादा कैलोरी की जरूरत इसलिए होती है ताकि बच्चे को ऊर्जा मिलती रहे। कैलोरी बढ़ाने के साथ ही गर्भस्‍थ स्त्री के भोजन में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल की मात्रा भी बढ़ा देनी चाहिए।
यह गर्भावस्था की वह अवस्था होती है जब गर्भवती स्त्री को हर समय अपने होने वाले बच्चे को देखने की बहुत इच्‍छा होती है। बच्‍चा होने पर आपको स्‍तनपान कराने के लिए पर्याप्‍त दूध पीने की जरूरत होती है। खाने में कैलोरी की मात्रा बढ़ाने के लिए आप सलाद खा सकती हैं। ताजे फलों और सब्जियों के साथ फाइबर और प्रोटीन भी ले सकती है। लो फैट डेयरी प्रॉडक्ट आपके लिए अच्‍छे रहेंगे। इस समय पानी खूब पीना चाहिए जिससे आपके शरीर में पानी की कमी न हो।

क्या प्यार में डूबा रहता है दिमाग

अक्सर ये देखा गया है कि जब कोई किसी से प्यार करता है तो वे हमेशा ही उसकी यादों में ही खोया रहता है। उसके दिमाग में हमेशा ही प्यार ही घूमता रहता है। ऐसे में सवाल आता है कि क्या प्यार में दिमाग डूबा रहता http://jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BEहै। क्या प्यार में आप किसी को अपना दिल दे चुके हैं? अगर हां, तो एक बात और गौर कीजिए। वैज्ञानिकों के मुताबिक प्यार में इंसान दिल ही नहीं, दिमाग भी दे बैठता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक प्यार में दिल की तरह दिमाग भी अहम भूमिका निभाता है। शोधकर्ताओं ने पूर्व में प्यार को समझने के लिए मस्तिष्क पर हुए शोधों का भी विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि किसी को चाहने के दौरान दिमाग के 12 क्षेत्र एक साथ काम कर
प्रमुख शोधकर्ता स्टेपहेनी आर्टीग्यू के मुताबिक किसी के प्यार में पड़ने में एक सेंकेंड का पांचवा हिस्सा लगता है। शोधकर्ताओं ने पाया http://jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BEजब कोई व्यक्ति किसी के प्यार में पड़ता है, तो मस्तिष्क के विभिन्न हिस्से कई रसायन जैसे ऑक्सीटोसिन (इन्हें 'लव हार्मोन' भी कहते हैं), एडरनालीन और वासोप्रैसिंग स्रावित करते हैं, जो आक्रामकता का कारण होते हैं। अन्य शोधों के मुताबिक रक्त में नर्व ग्रोथ फैक्टर नामक प्रोटीन मस्तिष्क की कोशिकाओं के रखरखाव और अस्तित्व के लिए जिम्मेदार होता है। शोधकर्ताओं की माने तो प्यार में अक्सर लोग दिल के साथ दिमाग भी दे देता है और हम समय अपने प्यार के बारे में ही सोच कर खोये रहते हैं।

Garbhavastha me Vyayam


 गर्भावस्था में व्यायाम का अभ्यास


गर्भावस्था  के दौरान अगर मां फिट रहेगी तो बच्चाक भी स्विस्थर रहेगा, इसके लिए जरूरी है गर्भावस्था  के दौरान व्याौयाम किया जाये। गर्भावस्थाि के दौरान प्रत्येहक महिला को सांस संबंधित व्याायाम जरूर करना चाहिए। यह बच्‍चे के पूर्ण विकास के लिए बहुत जरूरी है, क्योंहकि सांस के व्याायाम करने से बच्चे  को http://www.jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AEपर्याप्तर मात्रा में आक्सीतजन मिलती है और सांसों की बीमारियां भी नहीं होती हैं। इस लेख में जानिये कि गर्भावस्था  के दौरान सांसों के कौन-कौन से व्यारयाम करने चाहिए।
पेट से सांस लेना
पेट से सांस लेने को बैली ब्रीदिंग भी कहते हैं। इसे करने के लिए पैरों को मोड़कर आरामदायक मुद्रा में बैठिये, जबड़ों, कन्धों और नितम्बों समेत अपने पूरे शरीर को ढीला छोड़ दीजिए। एक हाथ अपने पेट पर रखें और दूसरा इसके ऊपर। निचले हिस्से से गहरी सांस लीजिए और पेट को हवा से भरकर 8 या उससे अधिक गिनती गिनें। धीरे-धीरे सांसों को छोड़ें। इस व्याहयाम को रोज 10 मिनट तक करें। पेट अधिक बढ़ जाने पर घुटनों पर हाथ रखकर भी इसे कर सकती हैं।
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इसे करने के लिए सीधे खड़े हो जाइये और अपने पैर एक-दूसरे के सामानांतर रखिये। मुह बंद रखें और 10 तक गिनते हुए गहरी सांस लीजिए। हाथों को छाती पर रखें, लेकिन ध्यान रखें इन्हेंो जोर से दबायें नहीं। सांस लेते हुए फेफड़े फूलने के साथ ही अपने हाथों को फैलायें। फिर आराम से सांसों को छोड़ें, जितना समय सांस लेने में लगाया उतना ही सांस छोड़ने में लगायें। इस व्यायाम को 10 बार कीजिए। गर्भावस्थां के सातवें महीने में इसे करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए इस वक्तछ इसे आराम से ही करें।
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इसे उथले सांस लेना कहते हैं, इसे कुछ मिनटों के लिए ही करना बेहतर है। इसे करने के लिए घुटनों को मोड़ते हुए पीछे की ओर झुकें और पैरों को सामानांतर रखते हुए सीधे खड़े हों जायें। इसके बाद अपना मुह पूरा खोलें और जल्दीऔ-जल्दीे सांसें लीजिए, यह फेफड़ों के लिए अच्छाी व्या याम है। दिन में कम से कम पांच मिनट के लिए यह व्यातयाम करें।
वैकल्पिक रूप से गहरी सांस लेना
इसे करने के लिए आरामयक स्थिति में बैठ जाएं या पैरों को मोड़कर बैठें या फिर पैरों को सीधा रखकर खड़े रहें। जबड़े, हाथ, घुटने, नितम्ब और कन्धों समेत पूरे शरीर को ढीला छोड़ दीजिए। इसके बाद गहरी सांस लें और कुछ सेकण्ड्स के लिए इस स्थिति में रहें। धीरे-धीरे इसे छोड़ें। फिर अपना मुंह चौड़ा खोलें और पांच तक गिनते हुए हवा अंदर खीचें।
गर्भावस्थार में व्याखयाम के साथ-साथ खानपान का विशेष ध्या न रखें और नियमिछत रूप से चिकित्स्क के पास जाकर जांच अवश्यस करायें।

Thursday, 12 March 2015

What falling in love does to your heart and brain

क्या प्यार में डूबा रहता है दिमाग

अक्सर ये देखा गया है कि जब कोई किसी से प्यार करता है तो वे हमेशा ही उसकी यादों में ही खोया रहता है। उसके दिमाग में हमेशा ही प्यार ही घूमता रहता है। ऐसे में सवाल आता है कि

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क्या प्यार में दिमाग डूबा रहता है। क्या प्यार में आप किसी को अपना दिल दे चुके हैं? अगर हां, तो एक बात और गौर कीजिए। वैज्ञानिकों के मुताबिक प्यार में इंसान दिल ही नहीं, दिमाग भी दे बैठता है।


शोधकर्ताओं के मुताबिक प्यार में दिल की तरह दिमाग भी अहम भूमिका निभाता है। शोधकर्ताओं ने पूर्व में प्यार को समझने के लिए मस्तिष्क पर हुए शोधों का भी विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि किसी को चाहने के दौरान दिमाग के 12 क्षेत्र एक साथ काम करते हैं।
प्रमुख शोधकर्ता स्टेपहेनी आर्टीग्यू के मुताबिक किसी के प्यार में पड़ने में एक सेंकेंड काhttp://www.jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE

पांचवा हिस्सा लगता है। शोधकर्ताओं ने पाया जब कोई व्यक्ति किसी के प्यार में पड़ता है, तो मस्तिष्क के विभिन्न हिस्से कई रसायन जैसे ऑक्सीटोसिन (इन्हें 'लव हार्मोन' भी कहते हैं), एडरनालीन और वासोप्रैसिंग स्रावित करते हैं, जो आक्रामकता का कारण होते हैं। अन्य शोधों के मुताबिक रक्त में नर्व ग्रोथ फैक्टर नामक प्रोटीन मस्तिष्क की कोशिकाओं के रखरखाव और अस्तित्व के लिए जिम्मेदार होता है। शोधकर्ताओं की माने तो प्यार में अक्सर लोग दिल के साथ दिमाग भी दे देता है और हम समय अपने प्यार के बारे में ही सोच कर खोये रहते हैं।

Exercise that help to reduce the labour pain

लेबर पेन से राहत दिलाने वाले व्यायाम

बच्चे के जन्म के समय प्रसव पीड़ा अर्थात लेबर पेन होना तो स्वाभाविक है। यह सभी गर्भवती स्त्री के लिए कष्टकारक होता है। अपने जीवन में सभी स्त्री गर्भवती स्त्री को यह लेबर पेन झेलना पड़ता http://www.jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AEहै। इस पेन से कोई नहीं बच सकता है लेकिन इस लेबर पेन को एक्सरसाइज के द्वारा कुछ हद तक कम अवश्य किया जा सकता है। इस दर्द की सबसे बड़ी वजह डिलीवरी के बारे में पूरी जानकारी न होना होती है।
अगर गर्भावस्था के दौरान आहार और भ्रूण के स्वास्‍थ्‍य के साथ-साथ लेबर पेन ( प्रसव पीड़ा) के बारे में सही जानकारी मिल जाए तो डिलीवरी के समय मन उतना आशंकित नही होता है।

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स्ट्रेथनिंग व्यायाम – गर्भावस्था के समय शरीर के कमर वाले इस हिस्से पर सबसे ज्यादा दबाव रहता है इसलिए प्री-प्रेगनेंसी में अक्सर स्त्रियों को कमर दर्द की शिकायत होती है। लेबर पेन के दौरान कमर दर्द से बचने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाइए, उसके बाद दोनों हाथों को ऊपर कीजिए। अब सिर को नीचे ले जाते हुए कमर ऊपर उठाइए। कुछ समय तक इस स्थिति में रहिए, फिर सामान्य स्थिति में आइए। इस एक्सरसाइज को 10  से 15 बार कीजिए। ऐसा करने से लेबर पेन के दौरान होने वाले कमर दर्द कम होता है।
http://www.jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AEक्रैम्‍पस के लिए - गर्भावस्था में अक्सर स्त्रियों को कमर के साथ-साथ पैरों में भी दर्द होने की शिकायत रहता है। पैरों के दर्द से बचने के लिए दोनों हाथों से खुद को सहारा देते हुए दीवार की तरफ मुंह करके खड़े हो जाइए। एक टांग को आगे की तरफ लेकर आइए और लगभग 90 डिग्री का कोण बनाने की कोशिश करें। इस बीच दूसरी टांग को खींचिए और दोनों पैरों को जमीन पर सपाट रखिए। एक पैर के साथ इस क्रिया को 10 से 15 सेकेंड कीजिए। उसके बाद दसरे पैर के साथ भी वैसा ही करें।
मसाज के द्वारा - लेबर पेन को कम करने के लिए मसाज बहुत अच्छा तरीका हैइससे दर्द बहुत कम होता है। लेबर पेन होने के दौरान खुद से या किसी के द्वारा पेट पर हल्के हाथ की मालिस करवाएं। मसाज के द्वारा पेट या उसके आस-पास होने वाला दर्द कम हो जाता है।
डिलीवरी के दौरान जोश में आकर कोई भी ऐसा व्यायाम ना करें जिससे आपको और भ्रूण को नुकसान हो।
नोट- किसी भी प्रकार का व्यायाम करने से पहले अपने चिकित्सक से इन व्यायाम के बारे में अच्छी तरह से जानकारी लेने के बाद ही व्यायाम करें।