Tuesday, 10 March 2015

Food avoid during pregnancy

जब आपको पहली बार अपनी गर्भवती होने की खबर मिलती है तो आपकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता। आप रह रहकर यह सोचती रहती हैं कि आनेवाला मेहमान कैसा होगा, उसके बारे में भावी योजनायें बनाने लगती हैं, लेकिन आपकी सबसे प्रमुख चिंता यह रहती है कि आनेवाला मेहमान सुंदर और स्वस्थ होगा कि नहीं। आप यह सोचकर परेशान रहती हैं कि गर्भावस्था के दौरान आपको क्या खाना चाहिए और क्या नहीं और कई महिलाओं को यह डर भी सताता है कि कही गर्भपात न हो जाये।
http://jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BEआइये, इस लेख में हम आपको बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान आपको क्या नहीं खाना चाहिए ताकि आपके गर्भ में पलने वाला बच्चा स्वस्थ रहे और आपको गर्भपात का खतरा कम से कम हो। क्योंकि अक्सर देखा गया है कि गलत खान पान की वजह से अधिकांश महिलाओं को गर्भपात हो जाता है।
गर्भधारण के दौरान क्या ना खाएं
गर्भावस्था में इन खाद्य पदार्थों के सेवन रखें परहेज-
  • किसी भी प्रकार के एलकोहॉव का सेवन से गर्भावस्था के दौरान परहेज रखें क्योंकि इसके सेवन से आपके होने वाले बच्चे के वजन पर, सीखने समझने की काबलियत पर, आंखों पर, अंगों पर, स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
  • http://www.jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82कैफीन का सेवन ना करें। यह गर्भवती महिला में गर्भपात और बच्चे के असामयिक जन्म का खतरा बढ़ा सकता है।
  • कच्चे अंडों में सलमोनेल्ला जीवाणुओं का समावेश होता है जिससे आहार संबधी बीमारियां होने का खतरा रहता है। उस खान-पान के सेवन से भी बचें जिनमे कच्चे अंडे मिले हुए होते हैं।
  • पारा यानी कि मरक्युरी बच्चे के मस्तिष्क के विकास में विलंब पैदा करता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान पारा युक्त मछली के सेवन से बचें।
  • गर्भावस्था के दौरान पपीता का सेवन करने से बचे चहे वे पपीता कच्चे हो या अधपके हो।
  • बैंगन, मिर्ची, प्याज, लहसुन, हिंग, बाजरा, गुड़ का सेवन कम से कम मात्रा में करना चाहिए, खासकर के उनको जिनका किसी न किसी कारण से पहले गर्भपात हो चुका है।
  • पिसे हुए मसालेदार मांस का सेवन करने से भी बचना चाहिए, क्योंकि उसमे हानिकारक जीवाणुओं का समावेश हो सकता
  • गर्भावस्था के दौरान घोंगा यानी कि सीपदार मछली का भी सेवन करने से बचना चाहिए।
  • कच्चे मांस का सेवन बिलकुल भी न करें, क्योंकि कच्चा मांस आपको साल्मोनेल्ला या टॉक्सोपलॉस्मोसिस से संक्रमित कर सकता है।
  • कॉफ़ी, चाय, और कोला जैसे वातित कैफिन युक्त पेयों के सेवन से भी बचना चाहिए।
  • मैदे से बनाये गए खान पान का भी सेवन न करें। उसी तरह उन खान पानों से भी बचें जिनमे शक्कर की मात्रा अधिक हो।
  • गर्भावस्था के दौरान खान पान में बड़ी मात्रा में जायफल का समावेश करना आपके लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
http://www.jkhealthworld.com/hindi/%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82गर्भावस्था के दौरान हरी सब्जियां खाना बहुत ही लाभदायक होता है लेकिन इस बात का विशेष ध्यान रखें कि हरी सब्जियां ताजे एवं स्वच्छ हों। इसके लिए आप बाजार से सब्जियां खरीदने के बाद अच्छी तरह से साफ पानी से दो तीन बार धो लिया करें। ऐसा करने से न सिर्फ सब्जियों में मौजूद जीवाणु साफ हो जाते हैं बल्कि अगर उनके ऊपर किसी तरह के कीटनाशक का छिडकाव किया गया होगा तो वह भी धुल जायेगा।
गर्भावस्था के दौरान अंकुरित अनाज खाने की भी मनाही होती है क्योंकि कई बार अंकुरित अनाज खाने से वैसे जीवाणु आपके शरीर के भीतर चले जाते हैं जो आपके बच्चे के लिए नुकसानदेह होते हैं।

Bad effects of coffee in pregnancy

कैफीन में 1,000 से अधिक सक्रिय यौगिकों (उत्तेजक) होते है। एक दिन में 6 से अधिक कप या 500 मिलीग्राम से अधिक कॉफी का सेवन करना शरीर पर हानिकारक प्रभाव डालता है। अधिक कॉफी पीने से फैलोपियन ट्यूब में मांसपेशियों की अनुचित विकास होता है जिसकी वजह से गर्भधारण करने में परेशानी आती है। यह अंडा निषेचन और गर्भाशय में भ्रूण आरोपण की प्रक्रिया में बाधा पहुंचाती है। गर्भवती महिलाओं में अधिक कॉफी यानी एक दिन 540 मिलीग्राम से अधिक से कॉफी पीने से भ्रूण के वजन और लंबाई में कमी आने का खतरा बना रहता है।
गर्भावस्था के दौरान कॉफी के सेवन से होने वाले प्रभाव-
गर्भावस्था में कॉफी का अधिक सेवन से सिर दर्द, चिड़चिड़ापन, बेचैनी, और मतली जैसे लक्षणों के होने की संभावना बढ़ जाती है।
कॉफी ज्‍यादा पीने से गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है।http://www.jkhealthworld.com/hindi/प्रसव-प्रक्रिया-में-सावधानियांकैफीन प्लेसेंटा और भ्रूण के विकास को बाधित करती है।
गर्भावस्था के दौरान कॉफी पीने से पाचन संबंधी समस्‍या भी पैदा हो सकता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान कम कॉफी पीनी चाहिए। ताकि गर्भधारण करने में कोई बाधा ना आए और गर्भधारण की क्षमता प्रभावित ना हो।
कॉफी के फायदे-
डॉक्टरों की माने तो निश्चित मात्रा में कॉफी का सेवन सुरक्षित होता है। 
अधिक कॉफी का सेवन जोखिम भरा हो सकता है, कम कॉफी पीकर आप गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताओं से बच सकते हैं। तीन कप या 200 मिलीग्राम कॉफी उन महिलाओं के लिए जो स्तनपान करा रही हैं, गर्भवती है या गर्भ धारण करने की कोशिश कर रही हैं, के लिए उचित है। गर्भवती महिलाएं कितनी मात्रा में कॉफी पिएं इसकी सलाह चिकित्सक से जरूर ले उसके बाद ही कॉफी का सेवन करें।

10 tips for Good Love Relationship


शादी के बाद वाला रोमांटिक मूड बनाए रखने के लिए पत्नी हमेशा पति से खूब लाड लडाए, पति की हर मांग और इच्छा को पूरा करने के लिए खुशीखुशी तैयार रहे। पति उसके लिए कुछ अच्छा काम करें, तो पत्नी उन्हें दिल से धन्यवाद देना न भूले।
नियमित रोमांस करने वाले कपल्स की फर्टिलिटी लंबे टाइम तक बनी
रहती है, जिससे बेबी प्लान करे में किसी तरह की कोई रूकावट नहीं आती है।
प्यार के रंगों से सराबोर रिश्ता ना सिर्फ दांपत्य में मिठास घोलता है, बल्कि जीवन सुखमय बीतता है। पर यह जरूरी है कि दोनों आपसी जिम्मेदारी को समझें।
यदि आपकी सेक्स लाइफ नीरस होती जा रही है, दोनों में से कोई एक पार्टनर सेक्स में बिल्कुल रूचि नहीं ले रहा, तो ये भी आपका रिश्ता टूटने की एक वजह हो सकती है।
आप दोनों छोटी-छोटी बातों पर उलझने लगें, एक दूसरे का सामना करने से कतराने लगें, घर पर रहते हुए भी एक-दूसरे को नजरअंदाज करें, तो आपका रिश्ता नाजुक मोड पर है।
अगर आप मजाकिया नहीं हैं, तो कोशिश करें कि अपने व्यवहार में मिठास लाएं और प्रैक्टिकल जोक का इस्तेमाल करें। मजाक ऎसा होना चाहिए जिससे आपका पार्टनर नाराज नाहो और ना उसे कोई बात बुरी लगें। मजाक ऎसा होना चाहिए जिसका अहसास सुखद हो।
महिलाओं को बिजी पुरूष ज्यादा पसंद आते हैं। महिलाओं को पीछे-पीछे घूमने वाले लोग बिल्कुल पसंद नहीं आते। महिलाएं ऎसे पुरूषों को ज्यादा पसंद करती है जिनके पास अपने विजन, पैशन, अच्छी एज्यूकेशन और बिजी लाइफ स्टाइल हो। बात बात करने और उठने-बैठने का तरीका ऎसा हो जो सब पर जादू कर दे। इसलिए आपकी पर्सनैलिटी अटे्रक्टिव होनी चाहिए। इसलिए खुद की पर्सनैलिटी को निखारें।
महिलाओं को सरप्राइज मिलने पर ज्यादा खुशी होती है। आप अपने साथी को अचानक प्रोग्राम बनाकर डिनर या मूवी के लिए आमंत्रित करें। प्यार के यही छोटे-छोटे पल लाइफ को खुशियों से भर देते हैं और छोटे-छोटे सरप्राइज प्यार की नींव को धीरे-धीरे मजबूत करते हैं।
अगर बाहर घूमने जाएं तो घर से एक दूसरे को हाथ पकडकर बाहर घूमने जाएं। अगर बाहर घूमने जाएं तो घर से एक-दूसरे का हाथ पकडकर बाहर निकलें। आपके पार्टनर के मन में अपनेपन का एहसास बढेगा। पार्टनर का छूना लडकियों को अच्छा लगता है। लेकिन मर्यादा का ध्यान रखें। एक साथ समय बिताकर आप अपने प्यार का इजहार बिना कहे भी कर सकते हैं।
रोमांस करते टाइम दोनों साथी बराबर सहयोग करें। कई बार महिलाएं जरा पीछे रहती हैं लेकिन उन्हें भी पूरा सहयोग करना चाहिए।

Monday, 9 March 2015

हरी पत्तेदार सब्जियों से गर्भावस्‍था में आवश्यक आयरन की पूर्ति करें।

हरी पत्तेदारसब्जियों से गर्भावस्‍था में आवश्यक आयरन की पूर्ति करें।

गर्भावस्था के दौरान मां के लिए आयरन बहुत महत्वपूर्ण तत्व है क्योंकि इस दौरान गर्भवति स्त्री को कई तरह की स्वास्थ समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिसकी वजह से खून की कमी सबसे बड़ी समस्या बन जाती है।

गर्भावस्था में संतुलित भोजन
आयरन से शरीर में हिमोग्लोबिन बनता है इसलिए गर्भवती स्त्रियों को आयरन युक्त चीजों का सेवन करना चाहिए। कई बार गर्भवती स्त्रियों को डॉक्टर आयरन की पूर्ति के लिए आयरन के टैबलट व कैप्सूल भी खाने को देते हैं। आज हम आप को बताने जा रहे हैं गर्भावस्था में आयरन की पूर्ति का स्रोत और क्यों जरूरत होती है आयरन की गर्भवती स्त्रियों में?
  1. स्त्रियों  में आयरन की जरूरत हीमोग्लोबिन बनाने के लिए होती है। यह प्रोटीन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाता है जो शरीर के विभिन्न अंगों तथा ऊतकों में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है।
  2. जब कोई स्त्री गर्भवती होती है तो उस गर्भवती स्त्री को सामान्य से 50 प्रतिशत अधिक खून की मात्रा चाहिए होती है जिसकी वजह से गर्भवती स्त्रियों में आयरन की जरुरत भी बढ़ जाती है।
  3. गर्भावस्था में संतुलित भोजनअगर गर्भवती स्त्री के खाने में आयरन की उचित मात्रा न हो अर्थात आयरन की उतनी मात्रा नहीं है जितनी कि उसके शरीर को जरूरत है तो  गर्भवति महिला को आयरन की कमी या एनीमिया होने का खतरा रहता है। गर्भावस्था में यह रोग फोलिक एसिड की कमी के कारण भी हो सकता है।
  4. आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया से समय से पहले डिलवरी और कम वजन या अल्पविकसित शिशु पैदा होने की संभावना रहती है।
  5. गर्भवती स्त्री में खून की कमी होने से शिशुओं के दिमाग में लाइलाज किस्म की क्षति होने का खतरा अधिक बढ़ जाता है।   

गर्भावस्था में कितनी मात्रा मेंलें आयरन 

गर्भावस्था के दौरान स्त्री को प्रतिदिन 30 मिलीग्राम आयरन की जरुरत होती है। गर्भावस्था की पहली एवं तीसरी तिमाही में आयरन की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है। एनीमिया से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन 120 मिलीग्राम का आयरन सप्लीमेंट अवश्य लेना चाहिए।

क्या है लक्षण आयरन की कमी का? 

गर्भवती स्त्री में आयरन की कमी होना पर कमजोरी होना, बहुत ज्यादा थकान होना, सांस लेने में समस्या होना, नाखूनों, आखों या होठों का पीला होना आदि लक्षण दिखाई देते हैं। 
  • हरी पत्तेदार सब्जियां आयरन का एक अच्छा स्रोत हैं। गर्भवती स्त्री को प्रतिदिन अपने खाने में पालक, मेथी, बथुए का साग लेना चाहिए।
  • आयरन से भरपूर अन्य सब्जियां हैं, ब्रोकोली, टमाटर, मशरूम, चुकंदर, कद्दू, शतावर तथा शकरकंदी।
  • गर्भवती महिलाएं चुकंदर का जूस भी ले सकती हैं। इससे शरीर में बहुत जल्दी खून बनता है।
  • चर्बीरहित मॉस, चिकन तथा मछली शामिल करने का प्रयास करें।
  • भोजन लोहे के बर्तनों में पकायें।
  • सब्जियों में मेथी या धनिये के पत्ते डालें जिससे स्वाद तो बढ़ता ही है, साथ में उनके पोषक तत्वों भी मिलता है।
  • काजू, नारियल, पिस्ता, किशमिश व अखरोट जैसे मेवे खाएं।
  • सोयाबीन, लोबिया, राजमा, काबुली चना और दालों जैसी फलियां।
  • फल जैसे कि तरबूज, अंगूर, सेब, केला, संतरा व स्ट्राबेरी
  • आटा या पास्ता, अनेक अनाजों से बनी ब्रेड, दलिया ।

Friday, 6 March 2015

Is sex painful the first time?

पहली बार सेक्स करने से संबंधी कई तरह के मिथ जुड़े हुए हैं जिसकी वजह से अक्सर लड़रियों रे मन में यह सवाल रहता है कि क्या संभोग के दौरान दर्द होना सामान्य है। लोगों का ऐसा मनोविज्ञान है कि पहले संभोग के समय में लड़कियों को काफी दर्द का सामना करना पड़ता है। इस दौरान ब्लीडि़ग को लेकर भी अनेक तरह की भ्रांतियां हमारे समाज में मौजूद हैं। क्या सचमुच पहला संभोग कष्टदायक होता है? संभोग करने की स्थिति से भी दर्द का कुछ नाता है? ऐसे कुछ भ्रम लोगों के मन में अकसर रहते हैं। कैसे आप इस दर्द से Is sex painful the first time?निजात पाकर सेक्स संबंधों का आनंद ले सकते हैं और अपने रिश्तों को सामान्य बना सकते हैं। आइए इन पोस्ट के द्वारा हम आप को सेक्स से संबंधी मिथ औप सचाई के बारे में जाने-
संभोग के दौरान होने वाले दर्द को मेडीकल की भाषा में दाईस्पेरेनिया कहते हैं। यह ऐसा दर्द है जो एक बार होने पर बार-बार हो सकता है और इस दर्द का असर महिला-पुरूषों के रिश्ते पर बहुत बुरा पड़ता है।
क्यों होता है दर्द-
    वास्तव में पहली बार संभोग के समय स्त्री को होने वाले दर्द का मुख्य कारण योनि का बहुत ज्यादा टाइट होना होता है। ऐसा तब होता है जब योनि की मांसपेशियां खींच जाती हैं और उनमें सूजन आ जाती है। ऐसी स्थिति में संभोग के समय स्त्री को बहुत अधिक दर्द होता है। ऐसा उन स्त्रियों के साथ होने की संभावना रहती है जो सेक्स संबंधों को बहुत बुरा मानती हैं और संभोग के समय पुरूष के साथ सहयोग नहीं करती। इसका मनोवैज्ञानिक असर यह होता है कि संभोग के समय योनि की मांसपेशिया सिकुड़ जाती हैं और परिणाम स्वरूप स्त्री को तेज दर्द का सामना करना पड़ता है।
   Is sex painful the first time? इसके अतिरिक्त योनि में किसी भी तरह का इंफेक्शन भी संभोग के समय दर्द का एक बहुत बड़ा कारण हो सकता है। अकसर योनि के आकार में परिवर्तन हो जाता है जिसे एंड्रियोमेट्रियोसिस कहते हैं। यदि आपको भी संभोग के दौरान दर्द होता है तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और उचित जानकारी एवं उपचार करवाएं।
    संभोग के दौरान होने वाले दर्द का एक मनोवैज्ञानिक कारण भी है। लड़कियों की परवरिश बचपन से ही इस तरह से की जाती है कि सेक्स को लेकर उनके मन में डर बैठ जाता है। वह सेक्स के नाम से ही घबराने लगती हैं और उन्हें अपनी किशोरावस्था और युवावस्था के दौरान यह भी सुनने को मिलता है कि पहली बार किया गया संभोग बहुत कष्टदायक होता है और इस दौरान खूब ब्लीडिंग भी होती है। लंबे समय तक यह भी माना जाता रहा है कि यदि पहली बार संभोग के दौरान ब्लीडिंग ना हो तो लड़की पहले सेक्स कर चुकी है। ये तमाम बातें लड़की के मन में मनोवैज्ञानिक रूप से संभोग के प्रति डर पैदा कर देती है और इस तरह की लड़कियों को पहली बार संभोग के दौरान अकसर दर्द की शिकायत होती है।
    यदि आप चाहते हैं कि आपको संभोग के दौरान दर्द ना हो तो आपको कुछ सेक्स पोजीशंस का इस्तेमाल पहली बार संभोग के दौरान करना चाहिए और आपको अपने मन से संभोग में होने वाले दर्द व अन्य मिथों को दूर कर देना चाहिए।


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